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कारुण्य meaning in Hindi

pronunciation: [ kaaruney ]
कारुण्य meaning in English

Examples

  1. उस शक्ति के पौरुष और कर्तव्य की कल्पना करके हमारे ऋषियों ने उसे पुरुष ठहराया है , तो उसमें रहे प्रेम और कारुण्य को देखकर शास्त्रकारों ने उसकी स्त्री रूप में कल्पना की है ।
  2. उस शक्ति के पौरुष और कर्तव्य की कल्पना करके हमारे ऋषियों ने उसे पुरुष ठहराया है , तो उ समें रहे प्रेम और कारुण्य को देखकर शास्त्रकारों ने उसकी स्त्री रूप में कल्पना की है।
  3. एक ओर जहाँ उत्पीडन , शोषण, अनाचार और अत्याचार जैसी सामाजिक विसंगतियों के प्रति ध्यान आकृष्ट किया गया है तो दूसरी ओर मानवीय संवेदना, ममत्त्व, दया, कारुण्य भाव, जनहित तथा श्रृँगार-परक भावना एवं अपनत्व की क्षमता अत्यधिक प्रखर है।
  4. नरेन्द्र देव की कविताओं , नाटय गीतों एवं आञ्चलिक कथा - सृष्टियों में जो राग-विराग, कारुण्य और स्नेह की मधुर-मोहक झॉकियाँ है, विपदग्रस्त छत्तीसगढ़ के भविष्य के लिए जो टीस, दर्द और कशिश है - वह सच माँ का ही अमूल्य अवदान है।
  5. कम से कम शब्दों में सारी स्थिति , घटना व पात्रों का यथार्थ परक प्रभावशाली जीवन अंकन करके रचनाकार ने पाठकों को भी उस स्थिति-अनुभूति में अनायास सम्मिलित कर लिया है और उस स्थिति से उत्पन्न विवशता का, कारुण्य का आस्वादक बना दिया है।
  6. एक ओर जहाँ उत्पीडन , शोषण , अनाचार और अत्याचार जैसी सामाजिक विसंगतियों के प्रति ध्यान आकृष्ट किया गया है तो दूसरी ओर मानवीय संवेदना , ममत्त्व , दया , कारुण्य भाव , जनहित तथा श्रृँगार-परक भावना एवं अपनत्व की क्षमता अत्यधिक प्रखर है।
  7. एक ओर जहाँ उत्पीडन , शोषण , अनाचार और अत्याचार जैसी सामाजिक विसंगतियों के प्रति ध्यान आकृष्ट किया गया है तो दूसरी ओर मानवीय संवेदना , ममत्त्व , दया , कारुण्य भाव , जनहित तथा श्रृँगार-परक भावना एवं अपनत्व की क्षमता अत्यधिक प्रखर है।
  8. वह कर्म अपने-आप में सम्पूर्ण होगा ; एक की उससे जीवन-रक्षा हुई होगी , दूसरे का-दूसरे का क्या ? केवल ऐसा ही और कर सकने के सामथ्र्य की वृद्धि : यानी वह वापी और गहरी हो गयी होगी जिससे वह कारुण्य छलकता है ...
  9. इण्डियन आयडल - दो के वे श्रोता जो स्थानीयता से कम मुग्ध थे और जिन्हें आज भी यह कहते सुना जा सकता है कि इस कार्यक्रम के दूसरे नम्बर पर रहे एनसी कारुण्य और चौथे नम्बर के अमय दाते सन्दीप आचार्य से ज्यादा प्रतिभाशाली थे।
  10. इसमें भी शायद उतना विरोधाभास नहीं है - लेकिन ठोस प्रेत ! और उससे से अधिक अस्वीकार्य और असंग है उस ठोस प्रेत का कारुण्य भाव - एक बाहर को बहता हुआ सबकुछ को सहलाता हुआ कारुण्य ! प्रेत किसी पर तरस कैसे कर सकता है ?
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