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कलाहीन meaning in Hindi

pronunciation: [ kelaahin ]
कलाहीन meaning in English

Examples

  1. यह गौर करने योग्य बात है कि आजकल दूरदर्शन चैनलों पर अधिकतर मुख्य कार्यक्रम उबाऊ , निरर्थक और फालतू लगते हैं , कलाहीन और सौन्दर्यविहीन , लेकिन ‘ एड ' यानी विज्ञापन कितने कलात्मक आ रहे हैं।
  2. मृत्यु से कोई संधि नहीं , जिसे देखा नहीं, जिसका पता ही नहीं हो, उससे कैसी और कौन-सी संधि ? फिर मृत्यु की यह खसलत है कि वह कलाहीन लोगों की तरफ से मुंह फेर लेती है, लेकिन, कलाकारों की तरफ बेसब्री से लपकती है।
  3. इस अवसर पर मुख्य वक्ता विष्णु खरे ने कहा कि - ” ये इतना नया उपन्यास है , इतने नए ढंग से लिखा गया उपन्यास है , इसका कारण यह है कि लगभग यह कलाहीन उपन्यास है , इसकी कला इसी में है कि यह कलाहीन है।
  4. इस अवसर पर मुख्य वक्ता विष्णु खरे ने कहा कि - ” ये इतना नया उपन्यास है , इतने नए ढंग से लिखा गया उपन्यास है , इसका कारण यह है कि लगभग यह कलाहीन उपन्यास है , इसकी कला इसी में है कि यह कलाहीन है।
  5. इन चारों बातों का जितनी उत्तम रीति से पालन होता है उतनी ही अधिक देव - प्रतिमायें दैवी - शक्ति - सम्पन्न होंगी और उपासकों का उतना ही अधिक कल्याण होगा , इन बातों की जितनी उपेक्षा होती है उतनी ही मूर्तियाँ दैवी कलाहीन हो जाती हैं।
  6. मृत्यु से कोई संधि नहीं , जिसे देखा नहीं , जिसका पता ही नहीं हो , उससे कैसी और कौन-सी संधि ? फिर मृत्यु की यह खसलत है कि वह कलाहीन लोगों की तरफ से मुंह फेर लेती है , लेकिन , कलाकारों की तरफ बेसब्री से लपकती है।
  7. अजीब विरोधाभास है कि रचना के संदर्भ में तो आग्रह यह हो जाय , जो कि पहले नहीं था , कि भाषा और यथार्थ के बीच का फासला न्यूनतम हो , लगभग कलाहीन और सपाट जबकि जीवन के साथ सीधे संपर्क में भाषा एक आड़ बन जाय , एक फासला .
  8. ग्राम्यजीवन को अहा , वाह करते रहना और उसके गड्ढ़ों को नजरअंदाज करते रहना सिखाने वाले महान कवि और उनके सगे किस पृष्ठभूमि से आए हैं और वे इन गड्ढ़ों को दिखाने की कोशिश करने वाले ग्राम्य जीवन को चित्रित करने की कोशिश करने वालों को कलाहीन क्यों समझते हैं, यह भी देखना जरूरी है।
  9. ऐसे लेखक या कवि प्राय : अपनी इस हीनता को छिपाने की चतुराई बरतते हुए साहित्य का एक ऐसा वातावरण रचते हैं जिसमें सहज , उन्मुक्त , रफ और टफ या फिर सरलता की धार लिए हुए निसर्ग प्रवाही जीवन अप्रासांगिक , पिछड़ा हुआ या फिर कलाहीन और शिल्प शून्य सा जान पडने लगे।
  10. ग्राम्यजीवन को अहा , वाह करते रहना और उसके गड्ढ़ों को नजरअंदाज करते रहना सिखाने वाले महान कवि और उनके सगे किस पृष्ठभूमि से आए हैं और वे इन गड्ढ़ों को दिखाने की कोशिश करने वाले ग्राम्य जीवन को चित्रित करने की कोशिश करने वालों को कलाहीन क्यों समझते हैं , यह भी देखना जरूरी है।
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