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कमसिनी meaning in Hindi

pronunciation: [ kemsini ]
कमसिनी meaning in English

Examples

  1. उसके जीवन में दुखों के पहाड़ टूट पड़े थे और कोई राह भी नहीं सूझती थी ! कमसिनी में ही अपनी आखिरी उम्मीद , अपने पति को खो चुकने के बाद उस लावण्यमयी युवती के ...
  2. ( सूरए अहज़ाब , आयत 49 ) में इरशाद है और जिन औरतों को कमसिनी या बुढ़ापे की वजह से हैज़ या माहवारी न आती हो या जो गर्भवती हों , उनकी इद्दत का बयान सूरए तलाक़ में आएगा .
  3. माहौल सही हो तो पुरानेपन ( आप बुजुर्गियत कह लें ) की कमसिनी और भी निखर उठती है ! कुदरत के हुस्न-ओ-ज़माल के सच्चे पारखी , तजुर्बेकार लोग ही होते हैं : ) ( चित्र १ , २ , ३ )
  4. ये खीरगी , ये दिलबरी, ये कमसिनी, ये नाज़ुकी दो चार दिन का खेल है, सब कुछ यहाँ पर आरिजी पहरे जुबानों पर लगें, हों सोच पर जब बंदिशें जुम्हूरियत की बात तब लगती है कितनी खोखली वाह वाह बहुत खूबसूरत शेर हैं।
  5. इमाम मुहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम को देखने के बाद मैंने मन ही मन सोचा कि यह कैसे संभव है कि इतनी कमसिनी में वह किस तरह जटिल सवालों के जवाब दे देते हैं और वैचारिक गुत्थियों को बड़ी आसानी से हल करते हैं।
  6. ( ख़ाज़िन , मदारिक , कबीर ) , कहा गया है कि उस कमसिनी के ज़माने में बच्चों ने आपको खेल के लिये बुलाया तो आपने फ़रमाया “ मा लिल लोअबे ख़ुलक़िना ” यानी हम खेल के लिये पैदा नहीं किये गए .
  7. ये खीरगी , ये दिलबरी , ये कमसिनी , ये नाज़ुकी दो चार दिन का खेल है , सब कुछ यहाँ पर आरिजी पहरे जुबानों पर लगें , हों सोच पर जब बंदिशें जुम्हूरियत की बात तब लगती है कितनी खोखली वाह वाह बहुत खूबसूरत शेर हैं।
  8. जबकि फूल और पत्तियों से ओस उड़ गई थी एक गुब्बारा उम्र बच्चा फिरता था गलियों में गुब्बारा बेचते गलियों में; जहाँ कटखने कुत्ते थे गाऐं थी मरखनी , शोहदे थे मुस्टंडे थे उसकी कमसिनी को ठगने के लिए पा आह्लादित एक गुब्बारा-उम्र बच्चा तोड़-तोड़ एक-एक रंग थमाता था
  9. किसी ने फेका है जाल ऐसा गगन के तारे उलझ गये हैं अब उसकी आँखों की कमसिनी के सभी सितारे भी बुझ गये हैं तभी से वह सब लगा है दिखने जो उससे अब तक छुपा हुआ था लगा है फिर वह जुलूस चलने अभी कहीं जो टिका हुआ था
  10. हमने सूरज कभी उगते कभी ढलते देखा आस्मानों का यहाँ वक़्त बदलते देखा कमसिनी में उन्हें इक गुल पे मचलते देखा और फिर फूल दिया जाना भी खलते देखा जिनका हर हुक्म चला , सिक्का चला,बात चली उन्हें पैदल भी अकेले यहीं चलते देखा अब्र में पानी था कि आग जो अबके बरसी धरा सुलगी, उधर आकाश उबलते देखा ग़ुलाब गालों पे खिल-खिल के खिलाने वाले!
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