कपीस meaning in Hindi
pronunciation: [ kepis ]
Examples
- ४ ८ ० ई . के बाद इस क्षेत्र पर एफ्थलाइटिस का अधिकार हो गया था और यहां कपीस और काबुल से भी शासन हुआ था।
- स्वर्गीय तेजी बच्चन ने ताउम्र हनुमान की पूजा की और उनके चौथे की सूचना देने वाली विज्ञप्ति में भी सबसे ऊपर लिखा है-‘जय हनुमान ज्ञान गुण सागर , जय कपीस तिहुं लोक उजागर।'
- तन तेज-कारी , कपीस वर केस हैं विकट अति भेष हैं, दण्ड दौ चण्ड-मन ब्रह्मचारी, करत जो चुगलई मोर दरबार में, करहू तेहि गर्द दल मर्द डारी, केसरी की आनि तोहि, सुनौ प्रभु कान दे, वीर हनुमान मैं सरन तोरी।।
- तन तेज-कारी , कपीस वर केस हैं विकट अति भेष हैं, दण्ड दौ चण्ड-मन ब्रह्मचारी, करत जो चुगलई मोर दरबार में, करहू तेहि गर्द दल मर्द डारी, केसरी की आनि तोहि, सुनौ प्रभु कान दे, वीर हनुमान मैं सरन तोरी।।
- जै हनुमान ज्ञान गुन सागर , जै कपीस तिहुँ लोक उजागर … ! कपि के भय से कपि की आराधना करता बालक तब कपि समान उछल कर नीचे उतर जाता है जब उसे ज्ञान हो जाता है कि अब कपि सेना उसके घर से प्रस्थान कर चुकी है।
- श्री ध्यानाराम महाराज ने सायं ४ : बजे से ६ बजे की भक्त चरित्र कथा में श्री राम भक्त में हनुमान के चरित का वर्णन किया गया और साथ में शास्त्री श्री सागर भाई ने हनुमान चालीसा गाया “ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ..... में श्री हनुमान भक्ति में श्रद्धालु झूले ”
- पवनपुत्र , पवनसुत , पवनकुमार , बजरंग बली , मारूति , महावीर , महाबीर , अंजनीनंदन , कपीस , बजरंग , केसरीनंदन , अनिलकुमार , हरीश , वातात्मज , अंजनासुत , अनिलात्मज , आंजनेय , आनिल , कपीन्द्र , कपींद्र , कपीश , पवन तनय , मारुति , हनुमंत , वातजात , हनू ; पवन के पुत्र जो बहुत ही बलशाली और अमर माने जाते हैं 5 .
- पवनपुत्र , पवनसुत , पवनकुमार , बजरंग बली , मारूति , महावीर , महाबीर , अंजनीनंदन , कपीस , बजरंग , केसरीनंदन , अनिलकुमार , हरीश , वातात्मज , अंजनासुत , अनिलात्मज , आंजनेय , आनिल , कपीन्द्र , कपींद्र , कपीश , पवन तनय , मारुति , हनुमंत , वातजात , हनू ; पवन के पुत्र जो बहुत ही बलशाली और अमर माने जाते हैं 5 .
- तब चाहिये कौन विचार बिचारो || कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के शोक निवारो | को नहीं जानत है जग मे कपि संकट मोचन नाम तिहारो || २ || अंगद के संग लेना गये सिया खोज कपीस यहाँ बैन उचारो | जीवत न बचिहो हम सो जू बिना सुधि लाय इहाँ पगु धारो || हेरी थके तट सिन्धु सबै तब लाय सिया सुधि प्राण उबारो | को नहीं जानत है जग मे कपि संकट मोचन नाम तिहारो || ३ || रावण त्रास दई सिया सो सब राक्षाशी सो कही शोक निवारो | ताहि समय हनुमान