कन्त meaning in Hindi
pronunciation: [ kent ]
Examples
- फ़ारसी सौगन्द में चाहे गन्ध ( बू ) नहीं है , मगर इसमें जो ‘ गन्द ' है , वह अवेस्ताई ‘ सौकन्त ' के ‘ कन्त ' से आ रही है जिसका अर्थ गन्धक ( सल्फ़र ) होता है और गन्धक में ‘ बू ' वाली ‘ गन्ध् ' धातु ही है।
- ‘सौ कन्त ' के बारे में गन्धक के अलावा एक अन्य सन्दर्भ पर्वत का मिलता है जिसके बारे में अवेस्ता और फारसी साहित्य में ज्यादा कुछ मिलता नहीं है, लेकिन जहाँ भी इसका उल्लेख हुआ है वहाँ एक वलयाकार स्वर्ण-पथ की मौजूदगी बताई गई है इसका सम्बन्ध धरती के किसी रहस्यमयी जादुई अध्यात्मिक जगह से है।
- सौ कन्त ' के बारे में गन्धक के अलावा एक अन्य सन्दर्भ पर्वत का मिलता है जिसके बारे में अवेस्ता और फारसी साहित्य में ज्यादा कुछ मिलता नहीं है , लेकिन जहाँ भी इसका उल्लेख हुआ है वहाँ एक वलयाकार स्वर्ण-पथ की मौजूदगी बताई गई है इसका सम्बन्ध धरती के किसी रहस्यमयी जादुई अध्यात्मिक जगह से है।
- और वैदिक संस्कृत व संस्कृत में . ...यह कहाँ है ???? क्या संस्कृत में सौगंध नहीं होती ...उर्दू- में तो कसम कहते हैं वह कहाँ से आया -सब कुछ उलटा-पुल्टा लगता है ....बेतरतीव ...अतार्किक ..गंधक में तो गंध होती ही नहीं ..फिर कान्त का गंध कैसे ..और ..कन्त .का अर्थ गंद या गंध नहीं ...अपितु संस्कृत में पति होता है ..
- फटे हुए चिथड़े पहनकर बीती है सर्दी आंसुओं की धार पीकर बीती है सर्दी पिया के सपने लेकर बीती है सर्दी लम्बी काली रातें जागकर बीती है सर्दी कम्पन , ठिठुरन , जकड़न में बीती है सर्दी न लौटे कन्त बड़े बेदर्दी दस्तक दे ले बसन्त समझ गई मैं सर्दी का हुआ अन्त किन्तु दरवाजा न खुलेगा जब तक आयेंगे न मेरे कन्त !
- फटे हुए चिथड़े पहनकर बीती है सर्दी आंसुओं की धार पीकर बीती है सर्दी पिया के सपने लेकर बीती है सर्दी लम्बी काली रातें जागकर बीती है सर्दी कम्पन , ठिठुरन , जकड़न में बीती है सर्दी न लौटे कन्त बड़े बेदर्दी दस्तक दे ले बसन्त समझ गई मैं सर्दी का हुआ अन्त किन्तु दरवाजा न खुलेगा जब तक आयेंगे न मेरे कन्त !
- इस राग की एक बड़ी प्यारी सी बन्दिश है जिसे कई सुप्रसिद्ध संगीतज्ञों ने तीनताल में निबद्ध कर प्रभावी ढंग से गाया है- आए बदरा कारे कारे , हमरे कन्त निपट भए बारे , ऐसे समय परदेश सिधारे | एक तो मुरला वन में पुकारे , मोहे जरी को अधिक जरावे | है कोई ऐसो , पियु को मिलावे ; उड़जा पंछी , कौन बिसारे |
- मेरे प्रिय , अब तुम्हीं बताओ कि तुम्हारे साथ प्रेम करके मुझे क्या हाथ लगा ? सिर पर कांटों का ताज भी पहन लिया , लेकिन तेरा मार्ग तक प्राप्त नहीं हो सका | अब तो बस यही इच्छा है कि चलकर प्रेमनगर ही बस जाइए , जहां हमारा कन्त रहता है | बुल्लेशाह तो अपने शौह ( सद्गुरु ) से यही प्रार्थना करता है कि वह प्रिय का दर्शन करा दे |