एक्का दुक्का meaning in Hindi
pronunciation: [ ekekaa dukekaa ]
Examples
- पहले चरण में हुए चुनाव के दौरान भी इसी स्थिति के कारण एक्का दुक्का वाहनों की आवाजाही से रोजाना सहित त्योहारी सीज़न में यात्रा करने वाले मुसाफिरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
- आज से लगभग दस साल पहले मई अपनी कविताये पत्रिकाओं में भेजता था और ज्यादातर खेद सहित की पर्ची प्राप्त हो जाती थी जो मायूश करती थे एक्का दुक्का छपने का सुख भी मिलता था .
- आदिवासियो ने दूर दूर तक फ़ैले बांझ इमारती जंगलो में , वन विभाग के कोप से बचे हुये एक्का दुक्का फ़ल और फ़ूलदार पेड़ो से एकत्रित स्वादिष्ट फ़ल फ़ूलों और पत्तियो के चढ़ावे के साथ शिवगणो के प्रमुख नंदी जी की पूजा की।
- आदिवासियो ने दूर दूर तक फ़ैले बांझ इमारती जंगलो में , वन विभाग के कोप से बचे हुये एक्का दुक्का फ़ल और फ़ूलदार पेड़ो से एकत्रित स्वादिष्ट फ़ल फ़ूलों और पत्तियो के चढ़ावे के साथ शिवगणो के प्रमुख नंदी जी की पूजा की।
- दोस्तों जैसा आप सब जानते है हिंदी पल्प साहित्य की दुनिया उजड़े एक जमाना हो गया और ऐसा इसलिए कह रहा हू की एक्का दुक्का को छोरकर पुराने नामचीन लेखको जिनका की नाम जहीर भाई ने अपने पुराने पोस्ट में जिक्र किया आज कही मौजूद नहीं है .
- भारत का दुर्भाग्य है की ऐसे लोग अब देश मैं एक्का दुक्का है यहाँ पर तो आतंकवाद के पुजरीओ के साथी जयदा है रहा सवाल क़ानून का तो उसके काम करने का अंदाज़ ज़ाहिर है सालो बीत जाते है नतीज़ा आने मैं , अगर समय पर कर दे तो धर्मनिरपेष सामने आ जाते है.
- बात ये है की जमाना बदल रहा है [ मेरी उम्र इतनी ज़्यादा नही है की मै ये बात कहू लेकिन १ ० साल मे जितना चेंज हुआ है वो मै ध्यान से देख रहा हूँ ] उदाहरण : पहले एक्का दुक्का लड़की साइकल लेती थी और अक्सर अपनी पैदल चलाने वाली सहेली के लिए वो भी पैदल
- अपवाद शब्द हिन्दी की ही है | डेली रूटीन मे अपवाद को नही गशीट सकते राधा जी | जो रोज , हर जगह समाज मे होता है और जो कभी कभार एक्का दुक्का एक दो विकृत इंसान द्वारा किया जाता है दोनो मे जमी और असमान का अंतर है | बात डेली लाइफ की हो रही त्ति , अपने ध्यान नही दिया |
- आज़ादी के बाद लाल बहादुर शास्त्री जी और एक्का दुक्का को छोड़ के एक भी प्रधान मंत्री बताये जो विवाद के घेरे मे आये ना हो ! यह विवाद मे घेरे हुए प्रधान मंत्री और मोदी जी के बीच मे सबसे बड़ा अंतर यह है की इस वक़्त पेहली देश एक ऐसे चक्रव्यहू मे फसा है की मोदी के अलावा किसी मे उभार ने की ताक़त नही है !
- एक लम्बे अरसे के बाद मैं मेरी जन्मभूमि पर जा रही हूँ . ..सिर्फ दो घंटेभर का रास्ता है पर ये दूरी तय करने में मुझे शायद तेईस साल लग गए ...एक्का दुक्का जाना हुआ पर उसकी गलियोंमें घुमने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो पाया ...उसे नजदीकसे देखने का महसूस करने का वक्त नहीं था ...पर इस वक्त मुझे वक्त छिनना है ...वक्तके हाथो से ....मुझे मेरी जन्मभूमि को बदला हुआ देखना है ....