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एकीभूत meaning in Hindi

pronunciation: [ ekibhut ]
एकीभूत meaning in English

Examples

  1. जब मनुष्य एक बार विश्व की अनन्त सत्ता से अपने को एकीभूत कर लेता है तब सारे देवता , देवदूत , नर-नारी , पशु , पेड़ पौधे उस एकत्व में विलीन हो होजाते हैं।
  2. उपनिषदों में जिसे ' शान्त शिवमद्वेैतं यञ्चतुर्थे मन्यते ' कहा गया है - उस शिव के समीप जाने से जीवात्मा का आवरणविक्षेप हटाकर परमतत्व शिव के साथ एकीभूत होना ही वास्तविक महाशिवरात्रि व्रत है।
  3. जीवात्मा का परमात्मा के साथ एकाकार होना ही योग है। परमात्मा और जीवात्मा क्या हैं ? आकाश का चांद मानो परमात्मा है और सरोवर में उसकी प्रतिछाया जीवात्मा है। जीवात्मा को परमात्मा के साथ कैसे एकीभूत किया
  4. समर्पण भाव से अभिभूत एकीभूत आलिंगन के फलीभूत पृथकता के द्वैत भाव को मेटकर तन - मन की एकचित् तता , मग् नता एवं एकात् मता में अस् तित् व के हेतु भोग से प्राप् त ‘
  5. जाति नामकर्म - जिन कर्मस्कन्धों से सदृशता प्राप्त होती है , जीवां के उस सदृश परिणाम को जाति कहते हैं * अर्थात उन गतियों में अत्यभिचारी सादृश से एकीभूत स्वभाव ( एकरूपका ) का नाम जाति है।
  6. समर्पण भाव से अभिभूत एकीभूत आलिंगन के फलीभूत पृथकता के द्वैत भाव को मेटकर तन - मन की एकचित् तता , मग् नता एवं एकात् मता में अस् तित् व के हेतु भोग से प्राप् त ‘
  7. अब , जब मनुष्य का समाज एकीभूत होकर अपनी सामर्थ्य को संगठित कर लेता है , और वह उसका उपयोग स्वार्थ में नहीं , प्रत्युत कर्तव्य-पालन में लगाता है , तो यह सामर्थ्य-समष्टि मनुष्य की सामर्थ्य होने पर भी देवता की सामर्थ्य हो जाती है।
  8. इससे इस बात की संभावना बढ़ेगी कि हम न्याय को अधिक मात्रा में प्राप्त कर सकते हैं , उसकी स्थापना कर सकते हैं … ' प्लेटो अपने विचारों के मामले में जड़ अथवा एकीभूत नहीं था , बल्कि उसकी मान्यताओं में समय के साथ परिवर्तन भी देखने को मिलते हैं .
  9. हमारी इड़ा और पिंगला नाड़ी के मध्यस्थल में सुषुम्ना नाड़ी प्रवाहमान है - जिसके मध्य प्राणायाम की सहायता से प्राणवायु को संचालित करके , मूलाधार , स्वाधिष्ठान , अनाहत , मणिपुर , विशुद्ध और आज्ञाचक्र का द्वार उनमुक्त होता है एवं प्राणशक्ति सहस्रार चक्र में परम शिव परमात्मा के साथ एकीभूत होती है।
  10. यह सही है कि लगान और राजस्व के एकीभूत हो जाने के कारण राज्य ही भू-स्वामी था , लेकिन गाँवों का अतिरिक्त उत्पादन समग्रतः राज्य ( या उसके सुपुर्ददारों ) के हाथों में नहीं जाता था , बल्कि वंशानुगत रूप से उसमें हिस्सा बाँटने वाला एक समूचा वर्ग मौजूद था जिसे मुगलकाल में ज़मीन्दार कहते थे।
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