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उत्तंग meaning in Hindi

pronunciation: [ utetnega ]
उत्तंग meaning in English

Examples

  1. कुछ बुजुर्ग लोग प्रत्यक्षदर्शी की तरह साक्ष्य देते हैं कि रात्रि में उन्होने उत्तंग और कलात्मक , देवालयों की ओर से आती हुई मनोहारी नृत्य-गान की मधुर ध्वनियाँ सुनी हैं,भक्त इन ध्वनियों को देवताओं द्वारा तीर्थकर की अर्चना करने का पौराणिक-पारम्ररिक उपक्रम मानते हैं।
  2. बर्फीली चोटियों पर तुम , क्यों अपना शरीर गलाते हो? जम जाता है जहाँ समय भी,क्यों अपना रक्त बहाते हो?तपती मरूभूमि में तुम,क्यों अपना बदन झुलसाते हो?जल जाता है जहाँ लौह भी,तुम कैसे साहस बचाते हो?पथरीले उत्तंग पहाड़ों पर तुम,क्यों अपने घुटने छिलवाते हो?पनप ना...
  3. बर्फीली चोटियों पर तुम , क्यों अपना शरीर गलाते हो? जम जाता है जहाँ समय भी,क्यों अपना रक्त बहाते हो?तपती मरूभूमि में तुम,क्यों अपना बदन झुलसाते हो?जल जाता है जहाँ लौह भी,तुम कैसे साहस बचाते हो?पथरीले उत्तंग पहाड़ों पर तुम,क्यों अपने घुटने छिलवाते हो?पनप ना
  4. शुभ हो नया वर्ष चलो एक बार फिर करें स्वागत नव वर्ष का ! यूँ तो सृष्टि हर क्षण नयी है उपजती है, मिटती हैउमडती है, गिरती है बनती है पल-पल अपनी गरिमा में कुछ और ही...नहीं था हिमालय का उत्तंग शिखर लाखों वर्ष प...
  5. दूध की तरह से सफेद जल , मां नर्मादा का, किन उत्तंग उची नीची अटखेलियां तो कर ही रहा है, साथ साथ एक मधुर संगीत भी निर्मित कर रहा है....पर उस सहासी पक्षी का क्या कहना जो....इस ऊफान में भी मछली ढुंड रहा है......स्वामी आनंद प्रसाद
  6. कुछ बुजुर्ग लोग प्रत्यक्षदर्शी की तरह साक्ष्य देते हैं कि रात्रि में उन्होने उत्तंग और कलात्मक , देवालयों की ओर से आती हुई मनोहारी नृत्य-गान की मधुर ध्वनियाँ सुनी हैं , भक्त इन ध्वनियों को देवताओं द्वारा तीर्थकर की अर्चना करने का पौराणिक-पारम्ररिक उपक्रम मानते हैं।
  7. शुभ हो नया वर्षशुभ हो नया वर्ष चलो एक बार फिर करें स्वागत नव वर्ष का ! यूँ तो सृष्टि हर क्षण नयी है उपजती है, मिटती हैउमडती है, गिरती है बनती है पल-पल अपनी गरिमा में कुछ और ही...नहीं था हिमालय का उत्तंग शिखर लाखों वर्ष प...
  8. आपकी चिंताएं निर्थक है , ' सनातन ' एक शाश्वत ' सत्य ' है , जो सूर्य के समान प्रकाशमान और मेरू के समान विशाल व उत्तंग है हम जैसे राई के दाने न उसकी विशालता , उत्तंगता को कम करने अथवा सत्य को भ्रमित करने में सक्षम है न हमारा राई सा योगदान सनातन के झंडे गाढ़ने में कोई मूल्य रखते है।
  9. से ज्यों बिखरा हो वर्षा-जल पहुँचे हम उत्तंग शिखर पर जहाँ डोलता सुधा जलद गूँज उठा घननाद प्रबलतम लगा बरसने लरज लरज सिक्त हुआ प्राणों का कण कण अंतह अति सुरभित , मधुमय तरल हुए हिम खण्ड पिघलकर हुआ परस्पर पूर्ण विलय थमा ज्वार, थी शांति चतुर्दिक लहराता तन मन उपवन आधिपत्य औ पूर्ण समर्पण- एक साथ, था महामिलन पल भर को तुम मुड़कर तकना अंतिम पल हैं;
  10. द्रुत गति से बहता अविरल तन आच्छादित स्वेद कणों से ज्यों बिखरा हो वर्षा-जल पहुँचे हम उत्तंग शिखर पर जहाँ डोलता सुधा जलद गूँज उठा घननाद प्रबलतम लगा बरसने लरज लरज सिक्त हुआ प्राणों का कण कण अंतह अति सुरभित , मधुमय तरल हुए हिम खण्ड पिघलकर हुआ परस्पर पूर्ण विलय थमा ज्वार, थी शांति चतुर्दिक लहराता तन मन उपवन आधिपत्य औ पूर्ण समर्पण- एक साथ, था महामिलन
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