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आमेज़ meaning in Hindi

pronunciation: [ aamej ]
आमेज़ meaning in English

Examples

  1. -2 - ज़रा जाए ख़त की क़ाबलीयत मुलाहेज़ा फ़रमाएं- फ़रमाते हैं के कूफ़े वाले इस लिये नहीं इताअत करते थे के इनकी निगाह तनक़ीदी और बसीरत आमेज़ थी और “ ााम ववाले अहमक़ और जाहिल थे इसलिये इताअत कर लेते थे।
  2. उन के जिसमों पर ज़ख़मों के निशान थे और वोह इस तर्हां सिधी तन कर चल रही थीं जैसे हज़ारों कपड़ों मैं उन के जिसम छुपे होण , जैसे उन की रूहों पर सकून आमेज़ मौत के दबीज़ साए छा गए होण।
  3. इरशाद है कि जब जंगे सिफ़्फ़ीन में मोहम्मद ने शिकवा आमेज़ लहज़े में आप से इस का ज़िक्र ( चर्चा ) किया तो आप ने फ़रमाया कि तुम मेरे हाथ हो वोह मेरीं आखें हैं लिहाज़ा हाथ को आखों की हिफ़ाज़त करनी चाहिये।
  4. उसमें एक किस्म की शिकस्त का भी अहसास था और नए हालत को हकीकत पसंदी से कबूल करने का जुर्रत आमेज़ रवैय्या भी " .यह कॉलम देख कर मुझे यकबयक अहसास हो उठा की मुझे अब इस देश में मेरे पिछले बयानात और तहरीरों की ही रौशनी में देखा जाएगा।
  5. बाज़ मुसन्नेफ़ीन इन वज़ेह और रौशन मोजिज़ात को तमस्ख़ुर आमेज़ नियत के साथ तावील करते हैं लेकिन हर पढ़ा लिखा इंसान अगर उनकी तशरीहात की तरफ़ तवज्जोह करे तो इसमें कोई शक व शुबहा बाक़ी नही रहेगा कि क़ुरआन मजीद का मक़सद इसके बरअकस है जो ये दानिश्वर तसव्वुर करते हैं ।
  6. ऐ अल्लाह ! हम तुझ से सवाल करते हैं कि तू हमें महरूम न पलटा , और न इस तरह कि हम अपने नफ़्सों पर पेचो ताब खा रहे हों और हमारे गुनाहों की बिना पर हमसे इताब आमेज़ ख़िताब ( सम्बोधन ) न कर और हमारे किये के मुताबिक़ हम से सुलूक न कर।
  7. हमारे जानवर प्यासे हैं और अपनी मन्ज़िल की तलाष में सरगर्दां हैं और अपने बच्चों के हक़ में इस तरह फ़रयादी हैं जैसे ज़न पिसर मुर्दा , सब चरागाहों की तरफ़ फेरे लगाने और तालाबों की तरफ़ वालेहाना तौर पर दौड़ने से आजिज़ आ गए हैं , ख़ुदाया ! अब इनकी फ़रयादी की बकरियों और इष्तिेयाक़ आमेज़ पुकारने वाली ऊंटनियों पर रहम फ़रमा।
  8. 40 . शिया इमामिया फ़िरक़ा अक़ीदा रखता है कि मुसलमानों का हक़ है कि उन इस्लामी हुकूमतों से फ़ायदा उठायें, जो किताब व सुन्नत के मुताबिक़ अमल करती है और मुसलमानों के हुक़ूक़ की हिफ़ाज़त करती है और दूसरी हुकूमतों से मुनासिब और मुसालेमत आमेज़ में राब्ता क़ायम करती हैं और अपनी सरहदों की हिफ़ाज़त करती हैं और मुसलमानों के सक़ाफ़ती, इक़्तेसादी और सियासी इस्तिक़लाल के लिये कोशिश करती रहती हैं ता कि मुसलमान बा ईज़्ज़त रह सकें।
  9. अलबत्ता यह वज़ाहत उन लोगों की है जो इस दुनिया के लिये एक ख़ुदा के अक़ीदे के क़ायल हैं और इंसाफ़ की रु से इस्लाम के दीनी निज़ाम के लिये महत्व के क़ायल हैं लेकिन वह लोग जो इस दुनिया के लिये किसी पैदा करने का अक़ीदा नही रखते हैं वह नबुव्वत , वही , आसमानी फ़रायज़ , सवाब , अज़ाब , स्वर्ग और नर्क जैसी बातों को धार्मिक राजनिती और दर अस्ल मसलहत आमेज़ झूठ समझते हैं।
  10. जिन में आईम्मा ( अ) से मुख़्तलिफ़ क़िस्म की हदीसें नक़्ल की गई हैं जैसे नहजुल बलाग़ा जिसे सैयद रज़ी ने तालीफ़ किया है और उसमें इमाम अली (अ) के ख़ुतबे, ख़ुतूत और हिकमत आमेज़ मुख़्तसर कलेमात मौजूद हैं और इसी तरह इमाम ज़ैनुल आबेदीन अली बिन हुसैन का रिसाल ए हुक़ूक़ और सहीफ़ ए सज्जादिया या इमाम अली (अ) का सहीफ़ ए अलविया और दीगर किताबें जैसे उयूने अख़बारे रज़ा, अत तौहीद, एललुश शरायेअ और मआनिल अख़बार तालीफ़ शेख़ सदूक़ वग़ैरह।
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