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अरिष्टनेमि meaning in Hindi

pronunciation: [ arisetnemi ]
अरिष्टनेमि meaning in English

Examples

  1. स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवा . .. भाग से शुरु होने वाले मंत्र के प्रतीक स्वस्तिक की पूर्व दिशा में वृद्धश्रवा इंद्र, दक्षिण में बृहस्पति इंद्र, पश्चिम में पूषा-विश्ववेदा इंद्र तथा उत्तर दिशा में अरिष्टनेमि इंद्र स्थित हैं।
  2. अर्हंतं , जिन , ऋषभदेव , अरिष्टनेमि आदि तीर्थंकरों का उल्लेख ऋग्वेदादि में बहुलता से मिलता है , जिससे यह स्वतः सिद्ध होता है कि वेदों की रचना के पहले जैन-धर्म का अस्तित्व भारत में था।
  3. अर्हंतं , जिन , ऋषभदेव , अरिष्टनेमि आदि तीर्थंकरों का उल्लेख ऋग्वेदादि में बहुलता से मिलता है , जिससे यह स्वतः सिद्ध होता है कि वेदों की रचना के पहले जैन-धर्म का अस्तित्व भारत में था।
  4. स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवा … भाग से शुरु होने वाले मंत्र के प्रतीक स्वस्तिक की पूर्व दिशा में वृद्धश्रवा इंद्र , दक्षिण में बृहस्पति इंद्र , पश्चिम में पूषा-विश्ववेदा इंद्र तथा उत्तर दिशा में अरिष्टनेमि इंद्र स्थित हैं।
  5. अरिष्टनेमि और कृष्ण तक तो यह परम्परा इस तरह साथ-साथ चली कि इनके फर्क को समझना आमजन के लिए कठिन ही था लेकिन बस यहीं से धर्म के व्य वस्थीकरण की शुरुआत हुई तो फिर सब कुछ अलग-अलग होता गया।
  6. भगवान श्री अरिष्टनेमी अवसर्पिणी काल के बाईसवें तीर्थंकर हुए | इनसें पुर्व के इक्कीस तीर्थंकरों को प्रागैतिहासिककालीन महापुरुष माना जाता है | आधुनिक युग के अनेक इतिहास विज्ञों ने प्रभु अरिष्टनेमि को एक एतिहासिक महापुरुष के रुप में स्वीकार किया है |
  7. जी 18 अरनाथ जी 19 मल्लिनाथ जी 20 मुनिसुव्रत जी 21 नमिनाथ जी 22 अरिष्टनेमि जी इन्हें नेमिनाथ भी कहा जाता है 23 पाश्वॅनाथ जी 24 महावीर स्वामी जी इन्हें वर्धमान भी कहा जाता है सम्प्रदाय दिगम्बर दिगम्बर मुनि ( श्रमण)वस्त्र नहीं पहनते है।
  8. उनके इस त्याग और व्रत के विषय में सुन कर अत्रि , वशिष्ठ, च्यवन, अरिष्टनेमि, शारद्वान, पाराशर, अंगिरा, भृगु, परशुराम, विश्वामित्र, इन्द्रमद, उतथ्य, मेधातिथि, देवल, मैत्रेय, पिप्पलाद, गौतम, भारद्वाज, और्व, कण्डव, अगस्त्य, नारद, वेदव्यास आदि ऋषि, महर्षि और देवर्षि अपने अपने शिष्यों के साथ उनके दर्शन को पधारे।
  9. रिषभदेव और अरिष्टनेमि तरह तीर्थंकरों ऋग्वेद में उल्लेख है , लेकिन जैन धर्म प्रदान की क्रेडिट के 23 तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ , और 24 तीर्थंकर , वर्धमान महावीर को एक संगठित रूप दिया जा सकता है | उन्होंने यह भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में मान्यता प्राप्त कर रहे हैं |
  10. आखिर एक वर्ष तक वर्षीदान देकर अरिष्टनेमि श्रावण शुक्ल षष्टी को प्रव्रजित हुए | चउव्वन दिनों के पश्चात आश्विन क्रष्ण अमावस्य को प्रभु केवली बने | देवों के साथ इन्द्रों और मानवों के साथ श्री क्रष्ण ने मिलकर कैवल्य महोत्सव मनाया | प्रभु ने धर्मोपदेश दिया | सहस्त्रों लोगों ने श्रमणधर्म और सहस्त्रों ने श्रावक -धर्म अंगीकार किया |
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