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अपलाप meaning in Hindi

pronunciation: [ apelaap ]
अपलाप meaning in English

Examples

  1. धर्म का यह अपलाप देखने को आता है , इसलिए संस्कृति शब्द का सहारा यदि लिया जाएऔर अपनी अन्तस्थ सहानुभूति का उत्तरोत्तर विस्तार साधते चला जाए, तो यह युक्तही है.
  2. इस प्रकार सूक्ष्मशरीर के अस्तित्व में ही भोग होने से -एक की विद्यमानता में ही भोग होता है , दूसरे की विद्यमानता में नहीं होता- इस मान्यता में प्रत्यक्ष के अपलाप का दोष आयेगा।
  3. ' ' ' अनुमान को न मानने पर व्यवहार की अनुपपत्ति का वारण '' ' चार्वाक यदि अनुमान प्रमाण नहीं मानेगा तो धूम को देख कर आग को जानने की प्रवृत्ति का अपलाप होने लगेगा।
  4. संस्कृत का विद्वान भी न तो गोविन्दप्रसाद को गोविन्दप्प्रसाद कहेगा न शिवप्रसाद को शिवप्प्रसाद , क्योंकि सर्वसाधारण के उच्चारण का न तो वह अपलाप कर सकता है , न बोलचाल की भाषा से अनभिज्ञ बनकर उपहास-भाजन बन सकता है।
  5. उनका तर्क है कि ' जब अनुभव के आधार पर सुखविरोधी क्रोध, शोक, भय आदि स्थायी भावों का रसत्व को प्राप्त होना मान लिया गया है तो फिर सहस्त्रगुणित अनुभव सिद्ध भक्ति को रस न मानना अपलाप है, जड़ता है।
  6. यद्यपि आचार्य शंकर का काल नागार्जुन से बहुत बाद का है , फिर भी नागार्जुन के समय औपनिषदिक धारा के अस्तित्व का अपलाप नहीं किया जा सकता , किन्तु उसकी व्याख्या आचार्य शंकर की व्याख्या से निश्चित ही भिन्न रही होगी।
  7. स्वभावत : सत् नहीं होने पर भी वस्तु का अपलाप नहीं किया जाता , अपितु इसका सापेक्ष या नि : स्वभाव अस्तित्व स्वीकार किया जाता है और उसी के आधार पर कार्य-कारण , बन्ध-मोक्ष आदि सारी व्यवस्थाएं सुचारुतया सम्पन्न होती हैं।
  8. श्री रामचन्द्रजी ने कहाः भगवन् , हे सर्वधर्मज्ञ , जो प्राक्तन कर्म है वही दैव है , ऐसा आपने बार बार कहा , फिर दैव है ही नहीं , इस प्रकार उसका आप अपलाप कैसे करते हैं यानी उसके अपलाप करने में आपका क्या अभिप्राय है ? ।।
  9. श्री रामचन्द्रजी ने कहाः भगवन् , हे सर्वधर्मज्ञ , जो प्राक्तन कर्म है वही दैव है , ऐसा आपने बार बार कहा , फिर दैव है ही नहीं , इस प्रकार उसका आप अपलाप कैसे करते हैं यानी उसके अपलाप करने में आपका क्या अभिप्राय है ? ।।
  10. कान्हा , राधा से क्यों रूठे “ मिल जाए कहीं कान खींच कर कह दूं ...”कान्हा , अब ना चलने की है रे तेरी चतुराई!” समझाया मन को .... फर्क है कृष्ण में , आम इंसान में ...बहुत फर्क है ! ब्लॉग दुनिया में लौटे फिर से ...देखा तो गिरिजेश जी अपलाप कर रहे हैं ....
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