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अनुरंजित meaning in Hindi

pronunciation: [ anurenjit ]
अनुरंजित meaning in English

Examples

  1. एक संगीतकार का जीवन जीते जीते कवि बन जाना , अपने जीवन का इतना बड़ा मोड़ ले आना फिर अपनी अंतर्भावानाओं से गुँथ जाना , फि र अपने आराध् य को ढूँढ़ना , फि र आराध् य के साथ अनुरंजित हो जाना , बहुत बड़ी साधना है।
  2. बिना उसके काव्य से सह्रदयों कातादात्म्य-सम्बन्ध स्थापित नहीं हो सकता , क्योंकि अनुपयुक्त उपमानों मेंकिसी वर्णित दृश्य का स्वाभाविक बिम्ब नहीं झलक सकता और न वे पाठकों केह्रदयस्थ विभिन्न रागात्मक भावों को जगाकर उन्हें आवश्यक भावात्मकमनोभूमि पर पहुँचाकर उनके अन्तर्जगत् को कवि के निर्दिष्ट भाव के उत्कर्षसे अनुरंजित कर सकते हैं.
  3. जैसे इन्द्रधनुष विस्मयोत्पादक अनेक प्रकार के रूपों से युक्त , विगुण-ज्या से रहित , लम्बा-चौड़ा , मेघाश्रित , शून्यात्मक आकाश में स्थित और स्वतः शून्य-अवस्तु है , वैसे ही यह तृष्णा भी विचित्र विषयों से अनुरंजित , असत् गुणों से युक्त , दीर्घ , मलिन पुरुष में आश्रित और शून्यात्मक मन में स्थित है।।
  4. मिथ्या दंभ में चूर स्वयं को श्रेष्ठ घोषित कर कोई श्रेष्ठ नहीं हो जाता निर्लज्जता का प्रदर्शन निशानी है बुद्धुत्व की सूर्य को क्या जरुरत दीपक के प्रकाश की वह . .. अनुभुति की सुकृति .... !! - अनुभूति ... से अनुभूत ... अनुभूति से अनुरंजित ... अनुभूति के अनुकूल ... अनुभुति से अनुरक्त ...
  5. देवतात्मा गिरिराज हिमालय की गोद में प्राकृतिक सुषमा से अनुरंजित हरिताभ से विभूषित तीस्ता की धारा की कल -कल ध्वनि से गुंजित केंद्रीय विद्यालय , एन एच पी सी ,सिंगताम सिक्किम राज्य के पूर्वी सिक्किम जनपद का एक ऐसा अनोखा शिक्षा का केंद्र है जिसकी शिक्षा की चर्चा जन-जन की जिह्वा पर है और जिसका परीक्षाफल श्रेष्ठ होता है|
  6. शरीर के निर्माण से अन्त तक जो प्रक्रिया चलती है वह शरीर की नियति है परन्तु शरीर के जन्म से लेकर मृत्यु तक जीव को जो दुःख , जो पीड़ा , जो कष्ट होते हैं वह बहुत ही अनुरंजित तथा अकथनीय हुआ करते हैं , उसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता है , बल्कि उसका अनुभव तो प्रत्यक्ष भावना से ज्ञान में आता है।
  7. दूर कहीं है आश तुम्हें पाने कि राह में भटकता फिर रहा अनजाने पथ पर आशाओं के दीप जलाऐ नतमस्तक है नया सवेरा फूलों से मन अनुरंजित हो कर ढूंढे वन वन चाह तुम्हारी महक उठेगा सारा आलम जब तुम होगे पास हमारे नहीं सूझती राह पथिक को अपने मन के राही हम हैं मुङेगी जिधर पथ उस पर चल देंगे हम आँखे मूंदे और कभी जो खिले दिवाकर किरणो से अपना दामन भर दे और घटा सुधा बरसाऐ नीले नीले अम्बर में फिर त्रप्त भाव से तारें गायें
  8. नया सवेरा दूर कहीं है आश तुम्हें पाने कि राह में भटकता फिर रहा अनजाने पथ पर आशाओं के दीप जलाऐ नतमस्तक है नया सवेरा फूलों से मन अनुरंजित हो कर ढूंढे वन वन चाह तुम्हारी महक उठेगा सारा आलम जब तुम होगे पास हमारे नहीं सूझती राह पथिक को अपने मन के राही हम हैं मुङेगी जिधर पथ उस पर चल देंगे हम आँखे मूंदे और कभी जो खिले दिवाकर किरणो से अपना दामन भर दे और घटा सुधा बरसाऐ नीले नीले अम्बर में फिर त्रप्त भाव से तारें गायें
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