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सजाव meaning in Hindi

pronunciation: [ sejaav ]
सजाव meaning in English

Examples

  1. सजाव दही ( उपले की धीमी आँच पर लाल होने तक गाढ़ा किये सोंधे दूध की मलाई सहित दही) दीवार पर मार दीजिये तो वहीं के वहीं चिपक जाय!पुरोहित भुनभुनाते हुये कहते - हँ, अब चमारे बेद पढ़इहें (हाँ, अब चमार ही वेद पढ़ायेंगे)।
  2. कूल सीजन में कल र और कैरेक्टर को मिलाक र सुंदर सजाव ट का कांबिनेश न बनाएं और देखिए कि रंग व आकृतियो ं का मिश्रण किस तरह कमरे की खूबसूरती को बढ़ा देता है वो भी तब जब आपकी कल्पनाशीलता उसे और अधिक निखार दें।
  3. रचना बाहुल्य के आधार पर प्राय : यह मान लिया जाता है कि, ब्रजभाषा काव्य का विषय रूप-वर्णन, शोभा-वर्णन, श्रृंगारी चेष्टा-वर्णन, श्रृंगारी हाव-भाव-वर्णन, प्रकृति के श्रृंगारोद्दीपक रूप का वर्णन विविध प्रकार की कामिनियों की विलासचर्या का वर्णन, ललित कला-विनोदों का वर्णन और नागर-नागरियों के पहिराव, सजाव, सिंगार का वर्णन तक ही सीमित है।
  4. रचना बाहुल्य के आधार पर प्राय : यह मान लिया जाता है कि , ब्रजभाषा काव्य का विषय रूप-वर्णन , शोभा-वर्णन , शृंगारी चेष्टा-वर्णन , शृंगारी हाव-भाव-वर्णन , प्रकृति के शृंगारोद्दीपक रूप का वर्णन विविध प्रकार की कामिनियों की विलासचर्या का वर्णन , ललित कला-विनोदों का वर्णन और नागर-नागरियों के पहिराव , सजाव , सिंगार का वर्णन तक ही सीमित है।
  5. रचना बाहुल्य के आधार पर प्राय : यह मान लिया जाता है कि , ब्रजभाषा काव्य का विषय रूप-वर्णन , शोभा-वर्णन , शृंगारी चेष्टा-वर्णन , शृंगारी हाव-भाव-वर्णन , प्रकृति के शृंगारोद्दीपक रूप का वर्णन विविध प्रकार की कामिनियों की विलासचर्या का वर्णन , ललित कला-विनोदों का वर्णन और नागर-नागरियों के पहिराव , सजाव , सिंगार का वर्णन तक ही सीमित है।
  6. ( १९६४) के विदाई गीत “डोलिया सजाव बाबुल” और “ढूंढ़त ढूंढ़त आँख थकि गइले” और “देख ली तोहार जब से बावरी सूरतिया” जैसे गीत, भोजपुरी फ़िल्म 'जोगिन' (१९६४) के “बिरही जोगनिया के” और “गंगिया रे जस तोर धार” तथा 'लोहा सिंह' (१९६६) के “पैंया लागी”, “बैरन रतिया रे” तथा “झूला धीरे से झुलावे” जैसे गीत भी इन इलाकों में त्रिपाठी की लोकप्रियता को आगे बढ़ाने में सहायक रहे।
  7. यह मेरा अपना खुद का आकलन है - किसी समाजभाषाविद का नहीं . खै र. .. अब खिंचड़ी पर्व से जुड़े कुछ शब्दों की सूची बनाने का एक प्रयास - ढूँढ़ी , ढुंढा , तिलकुट , चाउर , फरुही , लावा , बतासा , आदी , बहँगी , नहान , सजाव दही , कहँतरी , अहरा , बोरसी , गोइंठा , कबिली , रहिला , लुग्गा , फींचल , कचारल , भरकल , झुराइल ......
  8. यह मेरा अपना खुद का आकलन है - किसी समाजभाषाविद का नहीं . खै र. .. अब खिंचड़ी पर्व से जुड़े कुछ शब्दों की सूची बनाने का एक प्रयास - ढूँढ़ी , ढुंढा , तिलकुट , चाउर , फरुही , लावा , बतासा , आदी , बहँगी , नहान , सजाव दही , कहँतरी , अहरा , बोरसी , गोइंठा , कबिली , रहिला , लुग्गा , फींचल , कचारल , भरकल , झुराइल ......
  9. अलबत्ता बांह में तीन जगह और पैर में दो चोटों के महीन सिंगार के अवसर वैसे ही सहज-सुलभ हुए जैसे आमतौर पर बिहार की फिसलनभरी सड़कों पर हमारी तरह के सुलझे पथिकों को हो ही जाते हैं , फिर भी विवाह जैसे सामाजिक गैदरिंग के अवसर पर यह अफ़सोस बना रहा ही कि स्कोर्पियो, बोलेरो की झांकियों की ‘नवके' सजाव में बराती के ‘पुरनके' भेड़-ठंसाव में हम समाजोत्थान की परिघटना का ठीक-ठीक अनुशीलन कर क्यों नहीं पाये?
  10. और हुआ भी होता तो अपन गरीबदास के पास कछुआगर्दन सजाव कहां ? न ही एक फिरंगीचाम सुफ़ेद मित्र से चिरौरी किये थे बारह किताबों की लिस्ट थमा रहे हैं , ई-मेल के कीज़ नहीं हमारे ज़ि गर का ख़ून समझना , और अगली डाक के पहले हमारे पैकेट तैयार करने लगना , और हमारे कहने के पहले ही मित्र मित्रधर्म में ख़ून जलाने लगे थे , नहीं , ऐसा कुछ कहां होता , ऐसे मित्र अब कहां होते हैं ? ऐसा बुद्धिप्रवण मित्रसंपन्न समय कहां होता है ?
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