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वृष्य meaning in Hindi

pronunciation: [ verisey ]
वृष्य meaning in English

Examples

  1. आयुर्वेद ग्रंथ ' भावप्रकाश' के मुताबिक- 'लहसुन वृष्य स्निग्ध, ऊष्णवीर्य, पाचक, सारक, रस विपाक में कटु तथा मधुर रस युक्त, तीक्ष्ण भग्नसंधानक (टूटी हड्डी जोड़ने वाला), पित्त एवं रक्तवर्धक, शरीर में बल, मेधाशक्ति तथा आँखों के लिए हितकर रसायन है।
  2. ६बृंहणीय ( शरीर को मोटा करने वाली) वृष्य, बल्य, वातशामक, विषनाशक, गुल्म ( बाय का गोला), प्लीहारोग, यकृत विकार, कफ़रोग नाशक, ज्वरहर, ग्रन्थि नाशक( टुमर, सीस्ट,) नाशक, जले हुए मे लाभकारी, त्वचा के लिये हितकर,पैतिक और रक्त्ज रोगों का नाशक।
  3. गाय के दूध से निकाला हुआ मक्खन हितकारी , वृष्य , वर्ण को उत्तम करने वाला , बलकारी , अग्नि प्रदीपक , ग्राही और वातपित्त , रक्त विकार , क्षय , बवासीर , लकवा तथा खाँसी को नष्ट करता है।
  4. गाय के दूध से निकाला हुआ मक्खन हितकारी , वृष्य , वर्ण को उत्तम करने वाला , बलकारी , अग्नि प्रदीपक , ग्राही और वातपित्त , रक्त विकार , क्षय , बवासीर , लकवा तथा खाँसी को नष्ट करता है।
  5. ६बृंहणीय ( शरीर को मोटा करने वाली) वृष्य, बल्य, वातशामक, विषनाशक, गुल्म ( बाय का गोला), प्लीहारोग, यकृत विकार, कफ़रोग नाशक, ज्वरहर, ग्रन्थि नाशक( टुमर, सीस्ट,) नाशक, जले हुए मे लाभकारी, त्वचा के लिये हितकर,पैतिक और रक्त्ज रोगों का नाशक।
  6. अर्थात् लहसुन वृहण ( सप्तधातुओं को बढ़ाने वाला, वृष्य - वीर्य को बढ़ाने वाला), रस, रक्त, माँस, मेद, अस्थि, म”ाा, शुक्र स्निग्धाकारक, उष्ण प्रकृत्ति वाला, पाचक (भोजन को पचाने वाला) तथा सारक (मल को मलाशय की ओर धकेलने वाला) होता है।
  7. “”रसोनो बृंहणो वृष्य : स्गिAधोष्ण: पाचर: सर:।“” अर्थात् लहसुन वृहण (सप्तधातुओं को बढ़ाने वाला, वृष्य - वीर्य को बढ़ाने वाला), रस, रक्त, माँस, मेद, अस्थि, म"ाा, शुक्र स्निग्धाकारक, उष्ण प्रकृत्ति वाला, पाचक (भोजन को पचाने वाला) तथा सारक (मल को मलाशय की ओर धकेलने वाला) होता है।
  8. “”रसोनो बृंहणो वृष्य : स्गिAधोष्ण: पाचर: सर:।“” अर्थात् लहसुन वृहण (सप्तधातुओं को बढ़ाने वाला, वृष्य - वीर्य को बढ़ाने वाला), रस, रक्त, माँस, मेद, अस्थि, म"ाा, शुक्र स्निग्धाकारक, उष्ण प्रकृत्ति वाला, पाचक (भोजन को पचाने वाला) तथा सारक (मल को मलाशय की ओर धकेलने वाला) होता है।
  9. गुण : यह पाचक अग्नि बढ़ाने वाली, वृष्य, पाक होने पर मधुर रसयुक्त, रसायन, तनिक उष्ण, कटु रसयुक्त, स्निग्ध, वात तथा कफ नाशक, लघु पाकी और रेचक (मल निकालने वाली) है तथा श्वास रोग, कास (खांसी), उदर रोग, ज्वर, कुष्ठ, प्रमेह, गुल्म, बवासीर, प्लीहा, शूल और आमवात नाशक है।
  10. आयुर्वेद ग्रंथ ' भावप्रकाश ' के मुताबिक- ' लहसुन वृष्य स्निग्ध , ऊष्णवीर्य , पाचक , सारक , रस विपाक में कटु तथा मधुर रस युक्त , तीक्ष्ण भग्नसंधानक ( टूटी हड्डी जोड़ने वाला ) , पित्त एवं रक्तवर्धक , शरीर में बल , मेधाशक्ति तथा आँखों के लिए हितकर रसायन है।
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