लौह-पुरुष meaning in Hindi
pronunciation: [ lauh-purus ]
Examples
- मोदी ने लौह पुरुष को एक दम से लोहा ही मान लिया , उनके अंदर फूल जैसी कोमल भावनाएँ जो देश के प्रति थीं , उसे भुला कर ‘ लौह-पुरुष ' के अंतरभावना को कुर्सी की लालच में दफन कर दिया।
- सवालचंद पूछता है कि जब लौह-पुरुष श्री आडवाणीजी ने श्री जिन्ना को “ धर्मनिरपेक्ष ” कहा तो उनके यहां इतना वबाल क्यों मच गया ! उन्होने श्री जिन्ना की तारीफ़ की थी या बुराई ? मित्रों , सवाल बहुत से हैं।
- वैसे याद दिला दू की आज सरदार पटेल साहब की पुण्यतिथि है . ... क्या कहा कौन ?? अरे वही जिनको “ लौह-पुरुष ” कहा जाता है और बड़े - २ तिस्मारखाओ का सर उस महापुरुष का नाम याद आते ही सम्मान के साथ अपनेआप झुक जाता है
- उसी की सूचना थी ।” साथी ने कहा , “इतनी बड़ी घटना घट गई और तुम बहस करते रहे ।” वल्लभ भाई का उत्तर था, “और क्या करता ?” वह तो चली गई क्या अभियुक्त को भी चला जाने देता ?” ऎसे थे लौह-पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल।
- बजरिये बख्शीश-ए-लोहा , सोयी जनता जगायेंगे .फिर एक नयी इबारत गढ़ ,साथ सबको ले आयेंगे .भले ही दृढ इरादों ने ,उन्हें लौह-पुरुष बनाया था ,ढालकर उनको मूरत में ,लोहा तो ये दिलवाएंगे .मिटटी के लौंदे में लिपटे ,वे तो साधारण मानव थे .महज़ लोहमय शख्सियत को ,लोहसार ये बनायेंगे .मुखालिफ...
- लेकिन डर इस बात का भी है कि इस अदूरदर्शिता और अवसरवादिता का परिणाम कहीं ये न हो कि 600 रियासतों में बंटे जिस भारत को लौह-पुरुष सरदार पटेल ने एक सूत्र में पिरोया था , स्वतंत्रता के 60 वर्षों बाद अब वह भारत फिर 600 टुकड़ों में बंट जा ए.
- विकल्प नहीं होता जब कोई विकल्प तो होता है एक संकल्प दूर से दिखती हुई लौ पूरे रस्ते का सहारा होती है बेपरवाह हम चल पड़ते हैं न राह का पता होता है न ही राह में आने वाली घटनाओ का… कोई हो जाते हैं रु-बा-रु लौ की गर्मी से बन जाते हैं लौह-पुरुष कोई , तप …
- बीजेपी के लौह-पुरुष लालकृष्ण आडवाणी कोपभवन में चले गए हैं लेकिन उनकी नाराजगी को दरकिनार करते हुए बीजेपी 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नाम पर अपना दांव खेलने को तैयार हैं तो वहीं कभी 17 सालों तक बीजेपी का साथ देने वाली पार्टी जद ( यू ) ने बीजेपी के इस कदम को “ विनाश काले विपरीत बुद्धि ” की संज्ञा दी है .
- कल भारत के लौह-पुरुष सरदार पटेल की जयंती थी | इस अवसर पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने बिना शब्दों का जाल बुने स्पष्ट कह दिया कि यदि सरदार पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री बने होते , तो कश्मीर , आतंकवाद , साम्प्रदायिकता आदि कि आग में भारत न जलता | किसानों की समस्याएँ वीभत्स रूप धारण करने से पहले सुलझा ली जाती और भारत की दशा ऐसी न होती |
- इंदिरा और राजीव के बाद देश आडवानी सरीखे नेताओं के अधीन भी आ गया था जो देश की अबोध जनता के सामने यह साबित करने पर तुले हुए थे कि वे ही सरदार पटेल हैं , वे ही लौह-पुरुष हैं . पर जिन्होंने सरदार पटेल के हिंदूवाद को आक्रामकता और आपराधिकता से ही अधिक बढ़ावा दिया , देश की राजनीतिक फलक पर उन के प्रासंगिक होते ही सहसा हिंदू मुस्लिम घृणा इस सीमा तक बढ़ गई कि दोनों कौमें एक दूसरे की जानी दुश्मन सी दिखने लगी .