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मुस्तक meaning in Hindi

pronunciation: [ musetk ]
मुस्तक meaning in English

Examples

  1. 1 . आभिन्यास बुखार : त्रिकुटु , त्रिफला तथा मुस्तक जड़ , कटुकी प्रकन्द , निम्ब छाल , पटोल पत्र , वासा पुष्प व किरात तिक्त के पंचांग ( जड़ , तना , पत्ती , फल और फूल ) और गुडूची को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की बराबर मात्रा लेकर काढ़ा बना लें।
  2. बिल्व ( बेल ) फल का मज्जा , शुण्ठी ( सोंक ) , धान्यक ( धनिया ) के फल , मुस्तक ( मोथा ) की जड़ , सुगंध बाला ( तगर ) के फल को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर 14 से 28 मिलीलीटर की खुराक के रूप में सेवन करने से ज्वर अतिसार ठीक हो जाता है।
  3. बिल्व ( बेल ) फल का मज्जा , शुण्ठी ( सोंक ) , धान्यक ( धनिया ) के फल , मुस्तक ( मोथा ) की जड़ , सुगंध बाला ( तगर ) के फल को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर 14 से 28 मिलीलीटर की खुराक के रूप में सेवन करने से ज्वर अतिसार ठीक हो जाता है।
  4. गिरफतार अभियुक्त 1 - शाहरूख पुत्र असलम निवासी ग्राम सिकन्दरपुर मुस्तक थाना मीरापुर जनपद मुजफफरनगर बरामदगी 1 - एक तमंचा 315 बोर व जीवित कारतूस दो देशी पिस्टलें 32 बोर के साथ दो अभियुक्त गिरफतार जनपद मुजफफरनगरथाना बुढ़ाना दिनांक 22 - 10 - 13 को थाना बुढाना पुलिस द्वारा सूचना के आधार पर बायवाला मोड़ के पास से दो अभियुक्तों को गिरफतार किया गया।
  5. इस प्रकार की अनेक घटनाओं को उद्धृत करते हुए राबर्ट ब्रीफ्फालट अपनी प्रसिद्ध मुस्तक Ther making of humanity ( मानवता का सर्जनऋ में अपने उद् गार इन शब्दों में व्यक्त करता है- ‘‘ हमारे विज्ञान पर अरबों का एहसान केवल उनकी आश्चर्यजनक खोजों या क्रांतिकारी सिद्धांतों एवं परिकल्पनाओं तक सीमित नहीं है , बल्कि विज्ञान पर अरब सभ्यता का इससे कहीं अधिक उपकार है , और वह है स्वयं विज्ञान का अस्तित्व।
  6. चिरायता , शुंठी , देवदारू की लकड़ी , पाठा के पंचांग ( जड़ , तना , पत्ती , फल और फूल ) , मुस्तक की जड़ , मूर्वा , सारिया की जड़ , गुडूचीतना , इन्द्रयव और कटुकीप्रकन्द को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर रख लें , फिर इसी काढ़े को 14 मिली लीटर से लेकर 28 मिली लीटर को खुराक के रूप में पिलाने से स्तनों के रोग में स्त्री को लाभ पहुंचता हैं।
  7. चिरायता , शुंठी , देवदारू की लकड़ी , पाठा के पंचांग ( जड़ , तना , पत्ती , फल और फूल ) , मुस्तक की जड़ , मूर्वा , सारिया की जड़ , गुडूचीतना , इन्द्रयव और कटुकीप्रकन्द को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर रख लें , फिर इसी काढ़े को 14 मिली लीटर से लेकर 28 मिली लीटर को खुराक के रूप में पिलाने से स्तनों के रोग में स्त्री को लाभ पहुंचता हैं।
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