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मुख रोग meaning in Hindi

pronunciation: [ mukh roga ]
मुख रोग meaning in English

Examples

  1. यदि चिकित्सा ज्योतिष के परिवेक्ष में जन्मांग का निर्धारण करते है तो जो अब तक अनुभव में आया है कि जातक को दन्त रोग और मुख रोग अवश्य होता है और उसे बार बार दन्त रोग विशेषज्ञ के पास जाना पड़ता है |
  2. मसुढ़ों से खून का निकलना दन्त-मंजन करते समय मेरे मसुढ़ों से खून निकलता , मसुढ़ों में मवाद होना और पाइरिया का होना इस प्रकार से मुख रोग से पीड़ित इन्सान बाते करता या इलाज के लिए भटकता जो एक खान-पान की कमी के कारण ये बीमारी होती है .
  3. तंबाकू निषेध दिवस पर रैली ने शौकीनों को चेताया - दंदरौआ महाराज ने नशा छोड़ने की शपथ दिलाई , मुख रोग विषेशज्ञ डॉ . संजय शर्मा ने युवकों को दी गुटखा संस्कृति से तौबा करने की सलाह संजय गुप् ता ( मांडिल ) मुरैना ब् यूरो चीफ मुरैना , 1 जून।
  4. तंबाकू निषेध दिवस पर रैली ने शौकीनों को चेताया - दंदरौआ महाराज ने नशा छोड़ने की शपथ दिलाई , मुख रोग विषेशज्ञ डॉ . संजय शर्मा ने युवकों को दी गुटखा संस्कृति से तौबा करने की सलाह संजय गुप् ता ( मांडिल ) मुरैना ब् यूरो चीफ मुरैना , 1 जून।
  5. मुख रोग : - · मुंह में छाले पड़े हों , मसूढ़ों से खून आता हो , दांत हिल रहे हो तो गूलर की छाल या पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे मुंह में कुछ समय तक रख कर कुल्ला करके थूक दें , ऐसा दिन में 3 - 4 बार नियमित रूप से 15 दिनों तक करें।
  6. इस राशि के जातक स्वस्थ ही रहते हैं लेकिन गोचर में शुक्र या अन्य सूर्यादि ग्रह निर्बल होकर राशि पर आएंगे तो वीर्य विकार , नेत्र रोग, मूत्र रोग, मुख रोग, पाण्डु, प्रमह, गुप्त रोग, वीर्य की कमी, संभोग में अक्षमता, काम के अतिरेक के कारण स्नायुविक दुर्बलता, स्त्रीजन्य रोग, मधुमेह, वात एवं श्लेष्मा विकार, कामान्धत्व, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, धातु-क्षय कफ व वायु विकार एवं कोष्ठकबद्धता आदि रोगों के लक्षण शरीर में दृष्टिगोचर होंगे।
  7. वैसे तो ये स्वस्थ ही रहते हैं लेकिन जब इनकी राशि में गोचर में अशुभ ग्रह आते हैं या शुक्र ग्रह निर्बल होता है तो शरीर में अधोलिखित रोगों के लक्षण दृष्टिगोचर होने लगते हैं- वीर्य विकार , मूत्र रोग, नेत्र रोग, मुख रोग, पांडु, गुप्त रोग, प्रमेह, वीर्य की कमी, संभोग में अक्षमता, काम की अधिकता के कारण स्नायुविक दुर्बलता, मधुमेह, वात एवं श्लेष्म विकार, स्वप्न दोष, शीघ्रपतन, धातु क्षय, कफ एवं कब्ज, वायु विकार एवं कोष्ठकबद्धता आदि उत्पन्न हो जाते हैं।
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