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मिजराब meaning in Hindi

pronunciation: [ mijeraab ]
मिजराब meaning in English

Examples

  1. यह बिना मिजराब के संगीत उत्पन्न कर रहे हैं और उनके जादू से शब्द चिड़ियों की तरह उड़ते हैं , हवा में आग लग जाती है और फिर बिना दीप के नगर आलोकित हो जाते हैं.
  2. यह बिना मिजराब के संगीत उत्पन्न कर रहे हैं और उनके जादू से शब्द चिड़ियों की तरह उड़ते हैं , हवा में आग लग जाती है और फिर बिना दीप के नगर आलोकित हो जाते हैं .
  3. ढ़ाँचा तथा कम्पित पदार्थ युक्त वाद्य को छेड़ने अथवा बजाने के लिये किसीन किसी प्रेरक पदार्थ की सहायता अवश्य ली जाती है जैसे कोण अथवा जवा , शंकु, मिजराब, अथवा गज जिसके आघात अथवा रगड़ने के फलस्वरूप वाद्य सेध्वनि उत्पन्न होती है.
  4. इस आनंद से , चाहे वह कितना ही क्षणिक हो, जीवन सफल हो जाता है, फिर उसे कोई भूल नहीं सकता, उसी स्मृति अंत तक के लिए काफी हो जाती है, इस मिजराब की चोट हृदय के तारों को अंतकाल तक मधुर स्वरों में कंपित रखसकती है।
  5. इस आनंद से , चाहे वह कितना ही क्षणिक हो , जीवन सफल हो जाता है , फिर उसे कोई भूल नहीं सकता , उसी स्मृति अंत तक के लिए काफी हो जाती है , इस मिजराब की चोट हृदय के तारों को अंतकाल तक मधुर स्वरों में कंपित रखसकती है।
  6. इस सभा की साजिशों से तंग आक र , चोट खाक र गीत गाए ही बिना जो हैं गए वापिस मुसाफि र और वे जो हाथ में मिजराब पहने मुश्किलों की दे रहे हैं जिंदगी के साज को सबसे नया स्व र मौर तुम लाओ न ला ओ, नेग तुम पाओ न पा ओ, हम उन्हें इस दौर का दूल्हा बनाकर ही उठेंगे ।
  7. कवि : : कवि :: उसका दिल देह में कहाँ होता है देखती हूँ उसे कभी रात के सन्नाटे में बिना मिजराब बजा रहा होता है न जाने कौनसी दुनिया का सितार कि बहने लगता है अँधियारा और जब गुज़र जाता है पास से कोई दुःख का गहरा बादल तो चाँद को ढांपता एक न दीखने वाला इन्द्रधनुष छिटक जाता है चांदनी के पास .
  8. तत् वाद्यों में वादन शैली की दृष्टि से चार उपवर्ग किये जा सकते हैंउँगलियों से छेड़ कर बजाए जाने वाले जैसे तानपूरा अथवा तम्बूरा , एकतारा, स्वर मण्डल, कोण अथवा मिजराब से बजाये जाने वाले जैसे रुद्र वीणा, सरस्वतीवीणा, विचित्र वीणा, सितार, सरोद, गोटु वाद्यम, डणडी अथवा शलाका से प्रहरद्वारा बजाए जाने वाले सन्तूर, कानून जैसे वाद्य तथा गज से बजाने वालेवायोलिन, इसराज, सारंगी जैसे वाद्य.
  9. विशिष्ट वाद्यों के प्रेरक पदार्थ भी वाद्यों कीबनावट तथा प्रकृति के अनुरूप होते है सरोद को न मिजराब से बजाया जाता हैऔर न सितार , सुरबहार को जवे से, यही नहीं सारंगी, इसराज तथा वायोलिन केगज द्वारा बजाये जाने के बावजूद एक के गज़ से दूसरे का वादन संभव नहींहै, ऐसा नहीं है कि बजाने से ध्वनि ही नहीं निकलेगी परन्तु अपेक्षितनादात्मक प्रभाव नहीं उत्पन्न होगा.
  10. तुम्हें दूल्हे की तरह या क हूं जादूगर दूल्हे की तरह मंच पर सजा - संवार कर बैठा देती और खुद तानपूरा लेकर पीछे बैठ जाती - स्वरों का आधार बनाती , उसकी उंगलियां तानपूरे के तारों पर फिसल रही होतीं , मिजराब के अभाव में खुरदुरे होते पोर , मगर अब तुम्हें उन्हें चूमने को कौन कहे , देखने की भी फुरसत न होती ।
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