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मर्दित meaning in Hindi

pronunciation: [ merdit ]
मर्दित meaning in English

Examples

  1. ' दलित' शब्द का अर्थ है- जिसका दहन और दमन हुआ है, दबाया गया है, उत्पीड़ित, शोषित, सताया हुआ, गिराया हुआ, उपेक्षित, घृणित, रौंदा हुआ, मसला हुआ, कुचला हुआ, विनिष्ट, मर्दित, पस्त-हिम्मत, हतोत्साहित, वंचित आदि।
  2. ‘दलित ' शब्द का अर्थ है- जिसका दहन और दमन हुआ है, दबाया गया है, उत्पीड़ित, शोषित, सताया हुआ, गिराया हुआ, उपेक्षित, घृणित, रौंदा हुआ, मसला हुआ, कुचला हुआ, विनिष्ट, मर्दित, पस्त-हिम्मत, हतोत्साहित, वंचित आदि।
  3. यह सोच कर वह उन्मादित हो जाती है , क्या मुझे पाने के लिए ? कि अपनी मां की मर्दित देह का भाष्य जानने ख़ातिर जल रहा है , जला रहा है पूरी दुनिया को।
  4. कुछ समय अनन्तर इन्दीवर-निदित लोचन खुल गए , रहा निष्पलक भाव में मज्जित मन, बोले आवेग-रहित स्वर में विश्वास-स्थित - “मात:, दशभुजा, विश्व-ज्योति; मैं हूँ आश्रित; हो विद्ध शक्ति से है महिषासुर खल मर्दित; जनरंजन-चरण-कमल-तल, धन्य सिंह गर्जित!
  5. ऐसे में आप क् या कीजिएगा ? बातों की महीन डगर पर जान और लाज बचाकर चलिएगा ? या गुंडागिरी में मर्दित होकर लात फेंकने लगिएगा ? ठीक है , तो चलिए , नेक़ काम में देरी कैसी .
  6. कुछ समय अनन्तर इन्दीवर निन्दित लोचन खुल गये , रहा निष्पलक भाव में मज्जित मन, बोले आवेग रहित स्वर सें विश्वास स्थित “मातः, दशभुजा, विश्वज्योति; मैं हूँ आश्रित; हो विद्ध शक्ति से है खल महिषासुर मर्दित; जनरंजन-चरण-कमल-तल, धन्य सिंह गर्जित!
  7. कुछ समय अनन्तर इन्दीवर निन्दित लोचन खुल गये , रहा निष्पलक भाव में मज्जित मन, बोले आवेग रहित स्वर सें विश्वास स्थित “मातः, दशभुजा, विश्वज्योति; मैं हूँ आश्रित; हो विद्ध शक्ति से है खल महिषासुर मर्दित; जनरंजन चरणकमल तल, धन्य सिंह गर्जित!
  8. अर्थात् वे लोग जो सवर्णों द्वारा कुचले हों , मर्दित हों , जिसका मानवीय धरातल पर दलन किया गया हो , जिसे समाज में रौंदा गया हो , उसे दबाया गया हो उसे मान-सम्मान , धन-दौलत , काम-मजदूरी आदि में पनपने न दिया गया हो , उसे पल-पल अपमानित , लांछित , उपेक्षित किया गया हो , वह दलित है।
  9. अर्थात् वे लोग जो सवर्णों द्वारा कुचले हों , मर्दित हों , जिसका मानवीय धरातल पर दलन किया गया हो , जिसे समाज में रौंदा गया हो , उसे दबाया गया हो उसे मान-सम्मान , धन-दौलत , काम-मजदूरी आदि में पनपने न दिया गया हो , उसे पल-पल अपमानित , लांछित , उपेक्षित किया गया हो , वह दलित है।
  10. राम का पूरा जीवन अन्याय के प्रतिकार को समर्पित है परंतु वे इस कार्य में सफल होने के लिए अयोध्या के राजमहल से बाहर निकलते हैं तथा ऋषि मुनियों से लेकर निषाद और वानरों तक उन सब वर्गों से जुड़ते हैं जो रावण जैसी अलोकतांत्रित शक्ति के आतंक तले दलित मर्दित थे तथा अलग अलग होने के कारण उसका प्रतिकार नहीं कर पाते थे ; निर्वासित जीवन और अज्ञातवास भोगने के लिए मजबूर थे।
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