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भवती meaning in Hindi

pronunciation: [ bhevti ]
भवती meaning in English

Examples

  1. तितलीनुमा परियों से कभी राष्ट्र का नव निर्माण न हो सकेगा ! राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए स्त्री का कामिनी नहीं , माता का रूप चहिये ! माता निर्माता भवती = माँ ही निर्माण करने वाली होती है !
  2. ओम भवती पक्षकी रक्षा करें ' , ऐसा कहनेवाले रामदास स्वामी गांवगांवमें संपन्न घरके सामने जाकर खडे होकर कहते , ` ओम भवती भिक्षां देहि ' , कहीं अपमान होता था कहीं स्वागत , तो कहीं उस गृहस्थ अथवा गृहिणीका राजस अहंकार प्रकट होता था ।
  3. ओम भवती पक्षकी रक्षा करें ' , ऐसा कहनेवाले रामदास स्वामी गांवगांवमें संपन्न घरके सामने जाकर खडे होकर कहते , ` ओम भवती भिक्षां देहि ' , कहीं अपमान होता था कहीं स्वागत , तो कहीं उस गृहस्थ अथवा गृहिणीका राजस अहंकार प्रकट होता था ।
  4. बैठक में तय किया गया कि एनव्हीडीए द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस बार भी मोरकट्टा , बिजासन , भवती , जांगरवा , कुकरा , खेड़ी , मण्डवाड़ा , मेहगांव , विश्वनाथखेड़ा , ब्राहम्णगांव , बड़दा , मोहीपुरा , बोरलाय द्वितीय में राहत शिविर की व्यवस्था करके रखी जायेगी ।
  5. बैठक में तय किया गया कि एनव्हीडीए द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस बार भी मोरकट्टा , बिजासन , भवती , जांगरवा , कुकरा , खेड़ी , मण्डवाड़ा , मेहगांव , विश्वनाथखेड़ा , ब्राहम्णगांव , बड़दा , मोहीपुरा , बोरलाय द्वितीय में राहत शिविर की व्यवस्था करके रखी जायेगी ।
  6. फैंके नहीं , अर्पित किये ! आस-पास कीड़े-मकोड़े होंगे , अदृश्य जीव भी होंगे , थोड़ा उन्हें नहीं देना चाहिए क्या ? अकेले खाना पाप है ! पुराने ज़माने से वेद चिल्ला कर कह रहे हैं , ` केवलाघो भवती कैवलादि ' - ` जो केवल अकेले खाएगा वह पापरूप होगा।
  7. जहाँ वेदांती दार्शनिक शरीर के प्रति अवमानना की भावना रखते हैं और आत्मा को शरीर से पृथक बताते हैं वही चरक संहित स्पष्ट शब्दों में यह उल्ल्लेख करती है की - शरीरं ह्यस्य मूलं , शरीर मूलश्व पुरुषो भवती - अर्थात पुरुष का शरीर ही मूल है और शरीर मूल वाला ही पुरुष है।
  8. इतना ही नहीं गर् भवती महिला को यदि यह परीक्षण करवाना हो तो कानूनन उसे एक फार्म भरना अनिवार्य होता है , यदि इस फार्म में कुछ भी गलतियां पाई जाती हंै तो यह मान लिया जाता है कि संबंधित डॉक्टर ने लिंग का पता लगाने के लिए ही यह परीक्षण किया है।
  9. जहाँ वेदांती दार्शनिक शरीर के प्रति अवमानना की भावना रखते हैं और आत्मा को शरीर से पृथक बताते हैं वही चरक संहित स्पष्ट शब्दों में यह उल्ल्लेख करती है की - शरीरं ह्यस्य मूलं , शरीर मूलश्व पुरुषो भवती - अर्थात पुरुष का शरीर ही मूल है और शरीर मूल वाला ही पुरुष है ।
  10. जहाँ वेदांती दार्शनिक शरीर के प्रति अवमानना की भावना रखते हैं और आत्मा को शरीर से पृथक बताते हैं वही चरक संहित स्पष्ट शब्दों में यह उल्ल्लेख करती है की - शरीरं ह्यस्य मूलं , शरीर मूलश्व पुरुषो भवती - अर्थात पुरुष का शरीर ही मूल है और शरीर मूल वाला ही पुरुष है ।
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