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पदत्राण meaning in Hindi

pronunciation: [ pedteraan ]
पदत्राण meaning in English

Examples

  1. द्रौपदी उत्सुक हो उठी , ' किसका शिविर है , हम यहाँ क्यों आये हैं ? ' ' आशीर्वाद हेतु पितामह के समीप जा रही हो , पदत्राण बाहर ही , इधर , ' कृष्ण ने द्वार-पट की ओर इंगित किया .
  2. द्रौपदी उत्सुक हो उठी , ' किसका शिविर है , हम यहाँ क्यों आये हैं ? ' ' आशीर्वाद हेतु पितामह के समीप जा रही हो , पदत्राण बाहर ही , इधर , ' कृष्ण ने द्वार-पट की ओर इंगित किया .
  3. घोर कलयुग में गांधीवादी नेता और समाजसेवी अन्ना हजारे , कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी , भ ाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और योग गुरु बाबा रामदेव जैसे अन्य कई वि भ ूतियों पर पदत्राण फेंके जाएंगे जिससे उनकी लोकप्रियता में वृद्धि होगी।
  4. जगमग करते प्रासादों के स्वर्णिम प्रकोष्ठ , तुमको हैं सहज सुलभ करते चमचम वाहन ! हम पग घसीटते डगमग चलते सड़कों पर , पदत्राण नहीं , टकरा जाते अक्सर पाहन !! . आवास हमारे जीर्ण-ध्वस्त खंडहर जैसे , हम इसको ही अपना देवालय कहते हैं !
  5. जगमग करते प्रासादों के स्वर्णिम प्रकोष्ठ , तुमको हैं सहज सुलभ करते चमचम वाहन ! हम पग घसीटते डगमग चलते सड़कों पर , पदत्राण नहीं , टकरा जाते अक्सर पाहन !! . आवास हमारे जीर्ण-ध्वस्त खंडहर जैसे , हम इसको ही अपना देवालय कहते हैं !
  6. साथ ही यह एक स्वतंत्र उद्यमी के रूप में कई केन्द्रों पर प्रस्तावित विशेषज्ञता के दायरे में पर्याप्त विस्तार में बहु मूल्यवान् व परिधान्य आभूषण , चर्म-सामग्री, उपहार सामग्री, मेजपोश, घड़ियाँ, पदत्राण, हस्तशिल्प और रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े उत्पादों हेतु विद्यार्थियों को एक व्यवसायिक अवसर उपलब्ध कराता है।
  7. उधर वह कहे जा रहा था , ' तुम्हारा क्या ठिकाना ! कल को कहो पदत्राण उठा लो मेरा . मुझे उठाना पड़ेगा . ' ' बस चुप करो , तुमसे पदत्राण उठवाऊंगी मैं ! सोचना -समझना कुछ नहीं . बोलने की भी हद होती है . ' ' मैंनें कहा ही तो है .
  8. उधर वह कहे जा रहा था , ' तुम्हारा क्या ठिकाना ! कल को कहो पदत्राण उठा लो मेरा . मुझे उठाना पड़ेगा . ' ' बस चुप करो , तुमसे पदत्राण उठवाऊंगी मैं ! सोचना -समझना कुछ नहीं . बोलने की भी हद होती है . ' ' मैंनें कहा ही तो है .
  9. अपने यहाँ पदत्राण को शिरत्राण बनाने की परम्परा का जनतांत्रिक प्रादेशिक सभाओं में विधान तो है ही , मामला कहीं संसद तक पहुँच गया तो जूतियों में क्या बँटेगा, अन्दाज़ भी नहीं लगा सकते हम लोग क्योंकि दाल तो अब बाँटने लायक चीज़ रही नहीं इस महँगाई में… और फिर कहाँ-कहाँ चुर्रर्रर्र सुनाई देगा… बस सोच के ही रह जाते हैं।
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