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छलकाया meaning in Hindi

pronunciation: [ chhelkaayaa ]
छलकाया meaning in English

Examples

  1. वैसे आपना अन्ना जी के बहाने आपने पीसीओ जैसे पुराने जमाने की शराब को नयी बोतल में परोसकर मौके का खूब जाम छलकाया है।
  2. उदाहरण - कुंभ मेला गंगा और यमुना नदियों के संगम पर मनाया जाता है , जहां हिंदु धर्म-ग्रंथों के अनुसार देवों ने अमृत छलकाया था.
  3. इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुँचे बागेश्वर के जिलाधिकारी सी . एस . नपलच्याल ने जिस तरह अपना दर्द छलकाया , उसके [ … ]
  4. सूझ बूझ कर तोल तोल कर भावों को शब्दों में ढाला मन के रत्नाकर से सुन्दर यह कविता का सोम निकाला सही आप पहचाने पढ़ना , लिखने को होता आवश्यक गहरे भावों को छलकाया , बने कलम जब जब मधुशाला .
  5. भाषण देने से होगा क्या जो करके न दिखलाया तो नहीं , अब नही सहन होगा जो फिर से ललचाया तो आ कर्म क्षेत्र में , हो लथपथ पाओ पहले अनुभव , तुम्हे शपथ श्रधा से मतवाले दौड़ पडेंगे ज्ञान ज़रा सा भी छलकाया तो
  6. युग-युग जिये गुरुशरण सिंह ' का नारा बुलन्द किया तो आकाश गूँज उठा . पंजाब के दूर-दराज इलाकों से लोग उस आवाज को सुनने और उस किरदार को देखने आये थे जिसने अपने अभिनय से न जाने कितनी बार उनकी आँखों को छलकाया था .
  7. हाँ जो अलफ़ाज़ के हाथों में हैं संगे-दुश्नाम तंज़ छलकाये तो छलकाया करे ज़हर के जाम तीखी नज़रें हों तुर्श अबरुए-ख़मदार रहें बन पडे़ जैसे भी दिल सीनों में बेदार रहें बेबसी हर्फ़ को ज़ंजीर-ब-पा कर न सके कोई क़ातिल हो मगर क़त्ले-नवा कर न सके
  8. छत् तीसगढ में हिन् दी कथाकारों के साथ ही छत् तीसगढी कथाकारों नें भी उत् कृष् ट कहानियों का सृजन किया है और सामाजिक एवं सांस् कृतिक मूल् यों की स् थापना हेतु प्रतिबद्ध होते हुए धान के इस कटोरे में कहानियों का ‘ बाढे सरा ' बार बार छलकाया है।
  9. कवि मन हर उदासी को तोड़ देना चाहता है तभी तो कह उठता है- बेचैनियों को करके दफ्न दिल के किसी कोने में , रागिनियों से मन को बहलाया जाए खामोशी के आगोश से दामन को छुड़ा कर, ज़रा, स्वर को अधरों से छलकाया जाए अंतर्मन, एहसास, तेरे जाने के बाद, मौन जब मुखरित हुआ, यादों की पालकी में रचनाकार ने अपने मन की समग्र पीड़ा को कांगा की धरती पर, कलम की पिचकारी बना विरह के रंग से सजाया है ।
  10. कवि मन हर उदासी को तोड़ देना चाहता है तभी तो कह उठता है- बेचैनियों को करके दफ्न दिल के किसी कोने में , रागिनियों से मन को बहलाया जाए खामोशी के आगोश से दामन को छुड़ा कर , ज़रा , स्वर को अधरों से छलकाया जाए अंतर्मन , एहसास , तेरे जाने के बाद , मौन जब मुखरित हुआ , यादों की पालकी में रचनाकार ने अपने मन की समग्र पीड़ा को कांगा की धरती पर , कलम की पिचकारी बना विरह के रंग से सजाया है ।
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