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छँटा meaning in Hindi

pronunciation: [ chhentaa ]
छँटा meaning in English

Examples

  1. अतः मैं अपनी सभ्यता व शालीनता का परिचय देते हुए उनसे क्षमा माँगी और स्पष्ट करते हुए कहा कि आप इस फॉर्म का पाँचवाँ व छँटा बिन्दु देखिए।
  2. कुश भाई , बड़कन की लड़ाई में एक्ठो बड़का यानि कि हम छँटा हुआ बाकें है , भगवतीचरण की गुलामी से आज़ाद हुई के ईहाँ गदहालोट लगाय रहे हैं ..
  3. यहाँ वह टेलीफोन आपरेटर का काम कर तो रहे थे लेकिन गायक बनने का सपना उनकी आँखों से कोहरे की तरह छँटा नहीं और वह एक बार फिर बम्बई को निकल पड़े।
  4. यहाँ वह टेलीफोन आपरेटर का काम कर तो रहे थे लेकिन गायक बनने का सपना उनकी आँखों से कोहरे की तरह छँटा नहीं और वह एक बार फिर बम्बई को निकल पड़े।
  5. तभी जमघटे में से एक आवाज आयी , “ भाषण दे रहे थे- हॉर्न बजाना चाइये था, देखना चाइये था, हुँह...गांधी की औलाद...” अभी जमघट छँटा नहीं था कि वही शख्स जिसने आवाज़ लगाकर मुझे आगाह किया था।
  6. ब्लॉग जो आप लिखते हैं , ' यह सब बाहर छँटा ( माइकल कॅप्लन संदिग्ध मूल्य के यादृच्छिक सामान ) ' जिसे भी भारतीय भाषा कंप्यूटिंग में रुचि है इसके द्वारा अनदेखा नहीं किया जा सकता है | क्या आप भारतीय भाषाओं और स्क्रिप्ट के साथ अपने रिश्ते की व्याख्या कर सकते हैं ?
  7. अब तक के इतिहास का आह ! क्या रोमांचक पल है इसलिए तो छलियन शब्दों से आज छँटा हुआ सारा छल है और अपनी छटकती अनेकता में असली एकता का नारा लगाते हुए सब भावुक हो-हो कर कुछ- न-कुछ कहे जा रहे है साथ ही उनमे से कुछ तो प्रशंसकों की खुली प्रतियोगिता में अव्वल आने की लिए अजीबों-गरीब हरकत भी किये जा रहे हैं ....
  8. न इंसान न कुत्ता न गाय-बैल न चींटी न अमलतास न धरती न आसमान न चाँद न विचार न कल्पना न सपने न कोशिश न जिजीविषा कुछ भी नहीं पूँछ कटा कुत्ता बिना सींग के गाय-बैल पाँच टाँगों वाली चींटी छँटा हुआ अमलतास बंजर धरती क्षितिज पर रुका आसमान ग्रहण में ढका चाँद कोई अधूरा नहीं अगर तो फिर कैसे किसी स्त्री के स्तन का न होना अधूरापन है सूनापन है ?
  9. नूतन वर्ष , तुम्हारा स्वागत मन बंजारा भटक रहा था खोने का गम लिए निरंतर जीवन मूल्य नए पाने को ढूँढ रहा था नए जालघर कोहरा छँटा सामने पाया नवल रूप सृष्टि का प्राकृत दुश्चक्रों से घिरे वक्त का कुटिल रूप अब धुंधलाया सदमित्रों की एक नई सौगात नया मौसम लाया स्नेहसिक्त रिश्तों की गरिमा सहेजने को मन है उद्यत एकाकीपन हुआ पुरातन नई सहर सूरज के साथ जिसने हाथ बढाया आगे वही मित्र अपना है आज शांत ज्वार भाटा जीवन का फिर जिजीविषा हुई है जाग्रत - कल्पना रामानी मुंबई से १.
  10. क्या न्यूनतम मज़दूरी और खाद्य सुरक्षा के लिए कानून बनने से ये समस्याएँ दूर हो जायेंगी ? जब 64 साल के इतिहास में एक भी कानून ने कोई समस्या हल नहीं की तो ऐसा मानने वाला अव्वल दर्जे़ का मूर्ख या छँटा हुआ राजनीतिक छलिया और चार सौ बीस ही होगा कि जनलोकपाल ( या कोई भी लोकपाल ) बनने से भ्रष्टाचार की समस्या दूर होगी ! ज़्यादा उम्मीद तो यही है कि भ्रष्ट होने के लिए एक नया अधिकारी पैदा हो जायेगा ! इसलिए मूल सवाल है मौजूदा सामाजिक-आर्थिक ढाँचे में आमूल-चूल बदलाव।
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