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चेतनायुक्त meaning in Hindi

pronunciation: [ chetenaayuket ]
चेतनायुक्त meaning in English

Examples

  1. ' सत्-चित-आनंद' या राम में विश्वास होना ,अर्थात हृदय मे ऐसी पक्की धारणा का होना कि जीवन में असली आनंद स्थाई चेतनायुक्त आनंद(सत्-चित-आनंद) ही है,जिसको पाना संभव है और जिसका निवास भी हमारे हृदय में ही है,अत्यंत आवश्यक है.
  2. यह मस्तिष्क एक विशेष ढांचे में बद्ध हो सकता है यदि कोई व्यक्ति दुनियां के किसी विशेष भाग में , एक संस्कृति और परिवेश में रह रहा हो, तो भी यह एक सामान्य आम मानव चेतनायुक्त मस्तिष्क ही होता है।
  3. चेतनायुक्त प्रकृति का त्याग करके जड़वत पदार्थों के संग्रह में जुटा मनुष्य प्रेम की अस्मिता को तो कुचल ही चुका है , पर साथ ही , प्रेम के नाम पर पतन की नव सम्भावनाओं को जरुर तलाश रहा है .
  4. पर्वत शिखर के दर्रे से मॉर्डोर की तरफ़ निकलने की कोशिश की , लेकिन चेतनायुक्त कराध्रास ने उनको रास्ता नहीं दिया (फ़िल्म में ये हिस्सा सारुमान के काले जादू की वजह से था, जहाँ सारुमान ने कराध्रास को जगाया था) ।
  5. मैत्री ने कराध्रास ( ) पर्वत शिखर के दर्रे से मॉर्डोर की तरफ़ निकलने की कोशिश की, लेकिन चेतनायुक्त कराध्रास ने उनको रास्ता नहीं दिया (फ़िल्म में ये हिस्सा सारुमान के काले जादू की वजह से था, जहाँ सारुमान ने कराध्रास को जगाया था) ।
  6. चरित्र के उत्तरकालीन लक्षण- स्वयं की पहचान की जाग्रति , स्वनिर्धारक बनना, व्यक्तित्व में मस्तिष्क का समेकन करना, स्वशासित, बौद्धिक चेतनायुक्त होना, आसपास के समूह की जानकारी होना, आत्महित की ओर से सामूहिक आवश्यकताओं की ओर रूपांतरित होना, व्यक्तित्व का प्रभावी होना तथा व्यक्तित्व नियंत्रण होना।
  7. चरित्र के उत्तरकालीन लक्षण- स्वयं की पहचान की जाग्रति , स्वनिर्धारक बनना, व्यक्तित्व में मस्तिष्क का समेकन करना, स्वशासित, बौद्धिक चेतनायुक्त होना, आसपास के समूह की जानकारी होना, आत्महित की ओर से सामूहिक आवश्यकताओं की ओर रूपांतरित होना, व्यक्तित्व का प्रभावी होना तथा व्यक्तित्व नियंत्रण होना।
  8. वर्गसंघर्ष तो समाज की वास्तविकता है जिसमें हर कोर्इ सचेत या अचेत रूप में शामिल है ही , वर्गविभक्त समाज में और दुनिया में जो भी चेतनायुक्त इंसान है, जाने अनजाने किसी न किसी वर्ग या पक्ष में उसकी हिस्सेदारी है ही, उससे बचा नहीं जा सकता।
  9. यही हमारी संस्कृति का हिस्सा बनकर अपराध , भ्रष्टाचार , अहंकार , जातीयता एवं स्त्री के अपमान और सबल द्वारा उसके अपहरण को गौरवान्वित करने का ' पर्व ' बनकर नए सिरे से अचेतन और चेतनायुक्त मन के भीतर भरने मात्र का पर्व ही तो नहीं है .
  10. वर्गसंघर्ष तो समाज की वास्तविकता है जिसमें हर कोर्इ सचेत या अचेत रूप में शामिल है ही , वर्गविभक्त समाज में और दुनिया में जो भी चेतनायुक्त इंसान है , जाने अनजाने किसी न किसी वर्ग या पक्ष में उसकी हिस्सेदारी है ही , उससे बचा नहीं जा सकता।
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