चुगली करना meaning in Hindi
pronunciation: [ chugali kernaa ]
Examples
- मिश्रा जी बोले , ' भई वर्मा जी यह बात तो गलत है , शर्मा जी का मजाक उड़ाना , उनकी चुगली करना और बॉस से डांट खिलवाना .
- अडंगा डालना , औरों के फटे में टांग अड़ाना, टांग खींचना या राह में रोड़े डालना, चुगली करना या सीधा सीधा कहें तो ऊँगली करना लोगों का फेवरट टाइम पास है.
- कार्यालयों में अधिकारी से किसी की चुगली करना हो तो कुछ इसी प्रकार की आरती तैयार करनी पड़ती है , उसी अनुभव से मैंने देश की स्तिथि माता के सामने रखी है.
- चुगलखोर बहिनें एकता और अखंडता की मिसाल होती हैं , चाहे कैसी भी परिस्थिति इनके सामने आ जाए ,ये चुगली करना नहीं छोड़तीं हैं .मान लीजिए क ,ख , ग, घ,चार सहेलियाँ हैं..
- चरित्रहीनता , कुकर्म करना, अश्लीलता, नियमों का अनुशरण न करना, दूसरों का हक़ छीनना, चुगली करना, अपने फायदे के लिए झूट बोलना, दूसरों को नुकसान पह्नुचाने के लिए झूट बोलना, अपने पद और अधिकारों का दुरूपयोग करना, अपने कर्तव्य का सही तरह से पालन न करना, यह सब भ्रष्टाचार के ही रूप हैं.
- एक स्थान पर पडे रहना भोजन और आराम की तरफ़ अधिक ध्यान देना आलसी होना चुगली करना लोगो की खबरो को प्रसारित करना कामोत्तेजना के समय मे अधिक चंचल हो जाना कहे अनुसार ही काम करना अभाव मे स्वस्थ रहना और सम्पन्नता मे बीमारियों का लगना गर्म प्रदेश अच्छे लगना आदि बाते देखी जाती है
- कूड़ा दानी कूड़ा करकट कर्कश शब्द करना गप्प लगाना लार टपकाना टपकन / टपका-टपकी लार बहना जलदी-जल्दी बोलना चुगली करना बकवाद बक-बक करना लार का गिरना लार टपकना रिसाव लार लुढ़काते हुए ले जाना फुसफुसाहट कहा बुदबुदाना/गुणगुणाना बकबक करना खेल में गेंद को आगे की तरफ ले जाना गप शप करना अनर्गल कूड़ा करकट चीं-चीं की आवाज़
- मांसाहार , तम्बाकू , बेईमानी , जुआ , फैशनपरस्ती , आलस , गन्दगी , क्रोध , लोभवृत्ति , चटोरपन , जूठन छोड़ना , गाली देना , निन्दा करना , चुगली करना , कामुकता , शेखीखोरी , कटुभाषण , ईर्ष्या , द्वेष , कृतघ्रता आदि बुराइयों में से जो अपने में विद्यमान हों , उन्हें छोड़ना चाहिए।
- मांसाहार , तम्बाकू , बेईमानी , जुआ , फैशनपरस्ती , आलस , गन्दगी , क्रोध , लोभवृत्ति , चटोरपन , जूठन छोड़ना , गाली देना , निन्दा करना , चुगली करना , कामुकता , शेखीखोरी , कटुभाषण , ईर्ष्या , द्वेष , कृतघ्रता आदि बुराइयों में से जो अपने में विद्यमान हों , उन्हें छोड़ना चाहिए।
- कई बार हम समय , श्रम और धन तीनों का व्यय तो करते हैं , लेकिन उसका प्रतिफल शून्य होता है या फिर ऋणात्मक , जो हमें क्षणिक खुशी तो देता है , लेकिन स्थायी तौर पर दुख और तनाव का कारण बनता है जैसे - निंदा करना , चुगली करना , शराब पीना , झूठ बोलना आदि।