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चटकन meaning in Hindi

pronunciation: [ chetken ]
चटकन meaning in English

Examples

  1. पढिये कविता और आप भी जरा तुकबंदे का स्वाद लीजिए : अटकन - बटकन, दहिया चटकन, नानी लाई , खीर - मलाई , मुसवा मोटा , रुपिया खोटा, माला टूटी , किस्मत फूटी , गोल बताशे , खेल -तमाशे, खा लो चमचम , हरहर बमबम . .
  2. कई मर्तबा भू -दोलन से पहले भूमिगत फाल्ट्स में दवाब बनने लगता है यही दवाब चट्टानों को चटकाने लगता है समझा जाता है इसी चटकन के फलस्वरूप इतनी ओजोन ज़रूर पैदा हो जाती है चट्टानों के रिसाव से जिसे संवेदी उपकरणों द्वारा पकड़ा जा सके .
  3. आज फिर खुशी से दोस्ती करने को जी चाहता हैभंवरे की गुंजन से सारा जग गुनगुनाता हैतितली के पंखो के रंग देख मन यूही मुस्काता हैकलियों की चटकन सुन खामोशी को बोलना आता हैइनकी खुशी देख मेरा भी खुशी से दोस्ती करने को जी चाहता हैदूर अम्बर से झांक मुझे कोई अपने
  4. देवी के मंदिरों में देर रात तक गरबे और डाँडिया की चटकन , जैसे कोई अविराम उत्सव चल रहा हो ! सखी के इस बुद्धिृ-कौशल पर मदन-मोहन विस्मित हैं ! ' तुम तो प्रेमाभक्ति का उद्भव कर रही हो , पांचाली ! ' ' प्रेम और भक्ति में कोई अंतर है क्या ' , वह उन्हीं से प्रश्न कर देती है .
  5. कित्ता पानी ? ” माँ की सूनी आँखों में पूरा-का-पूरा समन्दर उतर जाता और उसकी गहराई में बसी धरती पानी के नर्म अहसास के बावजूद पूरी तरह चटक जाती पर हम उसकी चटकन से बेख़बर उसके छिछले तट पर ही अठखेलियाँ करते थक-हार कर माँ समन्दर को धीरे से तलहटी में उतार देती ताकि , उसके बच्चे खेल सकें एक मासूम सा खे ल. .. ।
  6. तीच ती ठराविक गाणी निरनिराळ्या वयाच्या गायकांकडून पुन्हापुन्हा गाऊन घेतात; मूळ गाण्याशी ताडून बघतात आणी तेवढं जमलं की खूष होऊन टाळ्या वाजवतात पुस्तकं , साप्ताहिकं, वर्तमानपत्रं, न्यूजचॅनल्स ह्या सगळ्यातही ह्सण्याच्या जागा शोधून काढतात आणि कुणी “-कविता” एवढं नुस्तं म्हटलं तर फारच जोरात ह्सतात-” कवी क्षणभर थांबला. मग खिन्नपणे म्हणाला- “-हे ही एक बरंच असतं- हसण्याची सोय असली की हसून चटकन विसरून जाता येतं-” कवीची समजूत घालणं अलीकडे कठीण होऊन बसलं होतं.
  7. एक राजा की बेटी थी , दो दिन से बीमार पड़ी, तीन डाक्टर सुन कर आए , चार दवा की पुड़िया लाए , पांच बार घिस गरम कराई , छः-छः घंटे बाद पिलाई , सात दिनों में आँखें खोलीं , आठ दिनों में हँस कर बोली , नौ दिनों में ताकत आई , दस वें दिन उठ दौड़ लगाई ! अटकन - बटकन, दहिया चटकन यह कविता भी प्रतिमा की यादों से.
  8. रतन चाहिए एक ख्वाब हसीन हो जो सकून दे वो झरनों सी झर-झर बारिश सी झम-झम कलियों की चटकन पायल की छम-छम झांझर की झन-झन कंगन की खन-खन हवाओं की सर-सर फिजाओं की रौनक हो जिसमें चाहिए एक ख्वाब बसे गुंजन में रहे तन-मन में नाचे आंगन में महके उपवन में सुरमई शाम में हर एक काम में पीपल की छांव में सपनों के गांव में जो ले जाए नित मुझको चाहिए एक ख्वाब
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