×

खनखन meaning in Hindi

pronunciation: [ khenkhen ]
खनखन meaning in English

Examples

  1. कभी तो बेटे की खनखन आँगन रोशन हो गया तीन पहर जो बीता तो यूँ बेटा खुद में खो गया हैं क्या मात-पिता पत्नी याद सताती है आशाएं . ..
  2. नैनीताल और चंपावत में तबले की थाप , मंजीरे की खनखन और हारमोनियम के मधुर सुरों पर जब 'ऐसे चटक रंग डारो कन्हैया ' गाते हैं , तो सभी झूम उठते हैं .
  3. फिर खनखन कीजिएगा कि बिसनाथ जो बिस्कोहर का खिस्सा सुनाए थे वैसा … बिसनाथ बिस्कोहर नहीं न घुमाए हो , लख्खा बुआ , बल्दी बनिया , जनदुलारी इन्हीं लोग का खिस्सा कहे ।
  4. नैनीताल और चंपावत में तबले की थाप , मंजीरे की खनखन और हारमोनियम के मधुर सुरों पर जब ' ऐसे चटक रंग डारो कन्हैया ' गाते हैं , तो सभी झूम उठते हैं .
  5. अम्माँ के सभी बच्चे अम्माँ के मरने की खबर से कहीं ज्यादा उस सिरहाने में ज्यादा रूचि ले रहे थे , जैसे ही उन्होंने सिरहाने का मुँह खोला उसमें से खनखन करके सोने की गिन्नियाँ गिर पड़ी सभी उन्हें समेटने में व्यस्त हो गये अम्माँ की लाश का किसी को भी ध्यान नहीं था ।
  6. मन के भीतर उमड़-घुमड़ कुछ बादल सघन ललक बरसन पर पछुआ की धार से छितर-बितर कुछ टुकड़ा इधर कुछ खाँड़ उधर घर के भीतर की खनखन कलरव बच्चों का कि अनबन घरनी के मन में कुछ तड़पन फिर ठनगन उठता नहीं स्वर गगन बस होती भनभन मन ही मन घरवाला अपने में मगन देख ना सके . ..
  7. मन के भीतर उमड़-घुमड़ कुछ बादल सघन ललक बरसन पर पछुआ की धार से छितर-बितर कुछ टुकड़ा इधर कुछ खाँड़ उधर घर के भीतर की खनखन कलरव बच्चों का कि अनबन घरनी के मन में कुछ तड़पन फिर ठनगन उठता नहीं स्वर गगन बस होती भनभन मन ही मन घरवाला अपने में मगन देख ना सके
  8. महीने-भर के अन्दर ही बातरा ने देखा , उस अशोक के नीचे बँधे हुए टीन के चारों और बोरिये की बजाय टीन की चादरें लग गयी हैं , जिसे उसका छोटा-सा बच्चा हाथ से पकडक़र हिलाता है , और खनखन ध्वनि होने पर जरा रुककर माँ की ओर देखता हुआ अपनी चालाक आँखों से मुस्कुरा देता है।
  9. जब शाही जी यह कह रहे थे कि प्रत्येक पदार्थ में एक आवाज़ गुंजार होती है , वही उसका शब्द होता है , उसी समय होटल के कर्मचरियों द्वारा परोसे जा रहे चाय के बर्तनों की मीठी रुनझुन और खनखन , शाही जी की बातों के लिए बतौर साक्ष्य सभागार में अचानक ही उपस्थित हो गयी थी ।
  10. मांग भरी थी उसने कल ही दुल्हन की , खनखन भी पूरी न सुनी थी कंगन की, चाँद सरीखा मुखड़ा तक न देख सका, एक रात की अंगडाई तक नहीं रुका, रुनझुन करती पायल के स्वर मौन हुए, सिहरन ने भी होंठ हृदयके नहीं छुए, भरी गुलाबों की डाली को भूल गया, फांसी के फंदे पर जाकर झूल गया, ऐसे अमर शहीद का तुम वंदन करना, सौ-सौ नहीं हजारों अभिनन्दन करना।
More:   Prev  Next


PC Version
हिंदी संस्करण


Copyright © 2023 WordTech Co.