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खड़िया मिट्टी meaning in Hindi

pronunciation: [ khedeiyaa miteti ]
खड़िया मिट्टी meaning in English

Examples

  1. फर्क सिर्फ इतना है कि स्कूल के बोर्ड पर मैं जो विचार लिखता था , वह ' ब्लैक बोर्ड ' पर ' खड़िया मिट्टी ' से लिखता था और आज ' वाइट-बोर्ड ' पर ' मार्कर पैन ' से लिखता हूँ। '
  2. फर्क सिर्फ इतना है कि स्कूल के बोर्ड पर मैं जो विचार लिखता था , वह ' ब्लैक बोर्ड ' पर ' खड़िया मिट्टी ' से लिखता था और आज ' वाइट-बोर्ड ' पर ' मार्कर पैन ' से लिखता हूँ। '
  3. धुली-सी सफेद ईटों की दीवारें , प्रवेश द्वार पर पत्थर की सीढ़ियों के किनारे, खड़िया मिट्टी से पुताई किए गमलों की करीने से की गई सजावट, और उन पर खिले, केसरी फूल, जीवन के किसी भी पड़ाव पर, मन को सुवासित करने में आज भी चूके नहीं हैं।
  4. वे आज भी शिवाकाशी में पटाखों से झुलसते हैं , खड़िया मिट्टी का काम करते हुए अपने हाथों को गला रहे हैं, बीड़ी बनाते हुए तंबाकू की जहरीली गंध को अपने नथुनों में पाल रहे हैं या फिर नरम कालीन बनाते हुए अपने हाथों को कठोर कर रहे हैं।...
  5. वे आज भी शिवाकाशी में पटाखों से झुलसते हैं , खड़िया मिट्टी का काम करते हुए अपने हाथों को गला रहे हैं, बीड़ी बनाते हुए तंबाकू की जहरीली गंध को अपने नथुनों में पाल रहे हैं या फिर नरम कालीन बनाते हुए अपने हाथों को कठोर कर रहे हैं।...
  6. वे आज भी शिवाकाशी में पटाखों से झुलसते हैं , खड़िया मिट्टी का काम करते हुए अपने हाथों को गला रहे हैं, बीड़ी बनाते हुए तंबाकू की जहरीली गंध को अपने नथुनों में पाल रहे हैं या फिर नरम कालीन बनाते हुए अपने हाथों को कठोर कर रहे हैं।
  7. वे आज भी शिवाकाशी में पटाखों से झुलसते हैं , खड़िया मिट्टी का काम करते हुए अपने हाथों को गला रहे हैं, बीड़ी बनाते हुए तंबाकू की जहरीली गंध को अपने नथुनों में पाल रहे हैं या फिर नरम कालीन बनाते हुए अपने हाथों को कठोर कर रहे हैं।
  8. गोबर-मिट्टी की दीवार पर स्त्रियाँ छुही यानी सफेद खड़िया मिट्टी के घोल में सूती कपड़े को भिगाकर उससे दीवार का एक टुकड़ा पोतती हैं और इसके पहले कि सतह सूखे , वे फुर्ती से उस पर उँगलियों से सीधी , आड़ी , तिरछी , लहरदार लकीरें उकेरती हैं .
  9. धुली-सी सफेद ईटों की दीवारें , प्रवेश द्वार पर पत्थर की सीढ़ियों के किनारे , खड़िया मिट्टी से पुताई किए गमलों की करीने से की गई सजावट , और उन पर खिले , केसरी फूल , जीवन के किसी भी पड़ाव पर , मन को सुवासित करने में आज भी चूके नहीं हैं।
  10. धुली-सी सफेद ईटों की दीवारें , प्रवेश द्वार पर पत्थर की सीढ़ियों के किनारे , खड़िया मिट्टी से पुताई किए गमलों की करीने से की गई सजावट , और उन पर खिले , केसरी फूल , जीवन के किसी भी पड़ाव पर , मन को सुवासित करने में आज भी चूके नहीं हैं।
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