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कुस meaning in Hindi

pronunciation: [ kus ]
कुस meaning in English

Examples

  1. पुतबा , तूं त भएहुं बिपति मा , बहुतइ सांसति म / पुतबा , कुसइ ओढ़न , कुस दासन , बनै फल भोजन / जो पूत होते अजुधिया म , उहइ पुर-पाटन / राजा दशरथ पटना लुटउतें , कौशिल्या रानी अभरन।
  2. पुतबा , तूं त भएहुं बिपति मा , बहुतइ सांसति म / पुतबा , कुसइ ओढ़न , कुस दासन , बनै फल भोजन / जो पूत होते अजुधिया म , उहइ पुर-पाटन / राजा दशरथ पटना लुटउतें , कौशिल्या रानी अभरन।
  3. पिता के जीवन का आठवा दशक प्रारम्भ हो गया है नाती-पोते ल ; कुस हो गए है मुझे भी मोटा चश्मा लग गया है बाल बगुले के रंग में , रंगते जा रहे है पिता है कि बच्चा समझते है ।
  4. पिता के जीवन का आठवा दशक प्रारम्भ हो गया है नाती-पोते ल ; कुस हो गए है मुझे भी मोटा चश्मा लग गया है बाल बगुले के रंग में , रंगते जा रहे है पिता है कि बच्चा समझते है ।
  5. मेन ने भभि से पुचा कि भभि कुच काम था जो आप ने मुझे याद किया तु भभि बोलि कया काम होगा तभि बुला सकति हून कया , मेन कुस समझ नहि पा रहा था कि भभि कया चहति हैन मुझसे ।
  6. आप खुस होना चाहते हैं तो दूसरों को खुस करें बस सीधा सा नियम है नीचे कुछ कुस होने के तरीके दिए जा रहें आप को भी कुछ तरीके मालूम हो तो मुझे अवश्य बताएं गली के सभी पिल्लों को नहला दें।
  7. नसरुद्दीन ने कहा , “क्षमा करना, अकारण ही राह से गुजरता था, और याद आ गया कि अपने छात्रावास के कमरे को एक दफा हो आऊं वर्षों बाद।' कमरे के भीतर गया, देखकर उसने कहा कि द सेम फनचर-वही पुरानी कुस है, वही मेज है।
  8. पिछे से कुछु लो , एगो लईकी के लेके खडा हो गईल, बाबा हाथ के इशारा से ओकरा के सामने के बिस्तर पर सुतावे के इसारा कई के, खुदुए कुछु कुस और कुछु ताबीज ले आवे कोठरी मे चल जात बानी, बाबा जी कहनी कि गुडिया हमरा पुजा वाला लोटा मे गंगाजल ले के आव।
  9. , उसी तरह महीलाए भी वीरता के नाम पर अपना सब कुस भुल कर अपने प्रजा ओर समाज के मान -सम्मान मे जलती ओर धधकती आग मे कुद गये....फ़ीर एक समय आया जब धीरे-धीरे समाज के लोग आपस मे ही एक दुसरे पर अपना साम्राज्य बडा करने की मह्त्वाकाशा ने आपस मे ही लड्ना शुरु कर दीया जीसका का नातीजा यह हुआ की उसका फ़ायदा दुसरे लोगो ने उटाया..
  10. , उसी तरह महीलाए भी वीरता के नाम पर अपना सब कुस भुल कर अपने प्रजा ओर समाज के मान -सम्मान मे जलती ओर धधकती आग मे कुद गये.... फ़ीर एक समय आया जब धीरे-धीरे समाज के लोग आपस मे ही एक दुसरे पर अपना साम्राज्य बडा करने की मह्त्वाकाशा ने आपस मे ही लड्ना शुरु कर दीया जीसका का नातीजा यह हुआ की उसका फ़ायदा दुसरे लोगो ने उटाया..
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