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काकु meaning in Hindi

pronunciation: [ kaaku ]
काकु meaning in English

Examples

  1. काकु ( सं . ) [ सं-पु . ] 1 . कंठ ध्वनि विशेष ; भाव या अर्थ भेद से ध्वनि में भेद होना 2 .
  2. किसी एक अभिप्राय वाले कहे हुए वाक्य का , किसी अन्य द्वारा श्लेष अथवा काकु से , अन्य अर्थ लिए जाने को ' वक्रोक्ति ' अलंकार कहते हैं।
  3. उन् हें एक दिन के लिए मेरे घर आकर देखना चाहिए ! काइतो और काकु भी हर घड़ी अपनी मां के किमोनो से लगे रोते-कलपते रहते हैं !
  4. प्रो . स्टीफ़न हॉकिंग और प्रो . मिशियो काकु के समझाने से भी यदि कोई प्रलयवादी नहीं मानता हो , तो उसके लिए एक और तथ्य ये कि आज LHC को सिर्फ़ चालू किया जा रहा है .
  5. श्लेष वक्रोक्ति में किसी शब्द के अनेक अर्थ होने के कारण वक्ता के अभिप्रेत अर्थ से अन्य अर्थ ग्रहण किया जाता है और काकु वक्रोक्ति में कंठ ध्वनि अर्थात् बोलने वाले के लहजे में भेद होने के कारण दूसरा अर्थ कल्पित किया जाता है।
  6. राजशेखर ने काव्य-मीमांसा के सातवें अध्याय , वाक्यभेद के अन्तर्गत काकु की चर्चा करते हुए काव्य के पाठ के संदर्भ जो कुछ कहा है उसे पढ़ कर आश्चर्य होता है कि राजशेखर जितना काव्य रचना की बारीकियों के प्रति सजग थे उतना ही काव्य की प्रस्तुति को लेकर आग्रही।
  7. जो न पारदर्शी न ठोस न गाढ़ा न द्रव न जाने कब एक तर्जनी की पोर से चखी थी उसकी श्यानता गई नहीं अब भी वह काकु से तालु से जीभ के बीचों-बीच से आँखों की शीतलता में भी वह प्रेम के बारे में मैं एक शब्द भी नहीं बोलूँगा।
  8. जो न पारदर्शी न ठोस न गाढ़ा न द्रव न जाने कब एक तर्जनी की पोर से चखी थी उसकी श्यानता गई नहीं अब भी वह काकु से तालु से जीभ के बीचों-बीच से आँखों की शीतलता में भी वह प्रेम के बारे में मैं एक शब्द भी नहीं बोलूँगा।
  9. बीच का विस्तार बन गया है आज पारावार भगवती भागीरथी- ग्रीष्म में यह हो गई थी प्रतनु-सलिला विरहिणी की पीठ लुंठित एकवेणी-सदृश जिसको देखते ही व्यथा से अवसन्न होते रहे मेरे नेत्र रिक्त ही था वरूण की कल-केलि का यह क्षेत्र काकु करती रही पुल की प्रतिच्छाया , मगर यह थी मौन उस प्रतनुता से अरे इस बाढ़ की तुलना करेगा कौन?
  10. मुनहना-सा जिस्म , पान से रंगे ओंठ , आँखों में सुरमे की हलकी रेखा और भँवों के नाटकीय उतार-चढ़ाव या आँखों को विस्फारित कर नैन-सैन के बाण चलाकर गूढ़ या रसीले भेद बताना , और स्टेज की दुनिया के किसी अन्तरंग रहस्य की चर्चा करते वक्त काकु के मजेदार प्रयोग और गर्दन मटकाने की आदत सब वैसा ही था जैसा कस्बाती औरतों के बतियाते बैठे किसी भी झुंड में होता है।
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