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कंटकारी meaning in Hindi

pronunciation: [ kentekaari ]
कंटकारी meaning in English

Examples

  1. - श्वेत कंटकारी के पंचांग को सुखाकर पाउडर बना लें तथा स्त्री में मासिक धर्म के ५ वें दिन से लगातार तीन दिन प्रातः एक बार दूध से दें एवं पुरुष को : अश्वगंधा 10 ग्राम , शतावरी 10 ग्राम , विधारा 10 ग्राम , तालमखाना 5 ग्राम , तालमिश्री 5 ग्राम सब मिलकर 2 चम्मच दूध के साथ प्रातः सायं लेने पर निश्चित लाभ होता है।
  2. एरंड के पेड़ की जड़ , सोंठ , कंटकारी , कटेरी , बिजौरा नींबू की जड़ , पाषाणभेद और त्रिकुटा की जड़ों को अच्छी तरह पीसकर बारीक चूर्ण को 20 ग्राम की मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें , इस बने काढ़े में जवाखार , हींग , सेंधानमक और अरंडी का तेल मिलाकर सेवन करने से आमजशूल , दिल का दर्द ( हृदय शूल ) , स्तनशूल , लिंग शूल यानी लिंग ( शिश्न ) का दर्द और अनेक प्रकार के दर्द समाप्त हो जाते हैं।
  3. एरंड के पेड़ की जड़ , सोंठ , कंटकारी , कटेरी , बिजौरा नींबू की जड़ , पाषाणभेद और त्रिकुटा की जड़ों को अच्छी तरह पीसकर बारीक चूर्ण को 20 ग्राम की मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें , इस बने काढ़े में जवाखार , हींग , सेंधानमक और अरंडी का तेल मिलाकर सेवन करने से आमजशूल , दिल का दर्द ( हृदय शूल ) , स्तनशूल , लिंग शूल यानी लिंग ( शिश्न ) का दर्द और अनेक प्रकार के दर्द समाप्त हो जाते हैं।
  4. दोषों के शामक जैसे-अमला , कंटकारी, आदि, दूषक जैसे-यवक मंदक आदि विष, स्व्स्थ्क वृत्ति कर जैसे वृष्य रसायन आदि, यद्यपि दोष शामक पदार्थ भी कभी दूषक हो जाते हैं, जैसे अधिक आमला के सेवन से अग्नि मंद हो जाती है, धातु दूषक विष भी दोष हर होते हैं,-विषम उदरहरम. इनका भी मिथ्या योग,अयोग,अतियोग, ही निंदनीय है, प्राय: जो पदार्थ जैसा है, वैसा मानना चाहिए, मणि के रहते अग्नि भी दाहक नहीं होता, इससे उसका दाहक गुण नष्ट नहीं होता इसी से इन्द्रियों को दोष्नाशक आदि प्रायिक देखना चाहिए.
  5. दोषों के शामक जैसे-अमला , कंटकारी, आदि, दूषक जैसे-यवक मंदक आदि विष, स्व्स्थ्क वृत्ति कर जैसे वृष्य रसायन आदि, यद्यपि दोष शामक पदार्थ भी कभी दूषक हो जाते हैं, जैसे अधिक आमला के सेवन से अग्नि मंद हो जाती है, धातु दूषक विष भी दोष हर होते हैं,-विषम उदरहरम. इनका भी मिथ्या योग,अयोग,अतियोग, ही निंदनीय है, प्राय: जो पदार्थ जैसा है, वैसा मानना चाहिए, मणि के रहते अग्नि भी दाहक नहीं होता, इससे उसका दाहक गुण नष्ट नहीं होता इसी से इन्द्रियों को दोष्नाशक आदि प्रायिक देखना चाहिए.
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