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उदग्रहण meaning in Hindi

pronunciation: [ udegarhen ]
उदग्रहण meaning in English

Examples

  1. सीमाशुल् क के उदग्रहण के लिए सभी वस् तुओं को समूहों तथा उपसमूहों में श्रेणीकृत किया जाएगा सीमा शुल् क प्रशुल् क अधिनियम , 1975 , में वस् तुओं का श्रेणीकरण दिया गया है तथा तदनुसार शुल् क की दर को विनिर्दिष् ट किया गया हैं : -
  2. जब सीमा शुल्क का उदग्रहण यथा मूल्य दरों पर किया जाता है अर्थात इसके मूल्य के आधार पर किया जाता है तो निरंकुशता से बचने के लिए तथा विभिन्न सीमा शुल्क संगठनों में समरूप दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मूल्यनिर्धारण हेतु व्यापक दिशानिर्देश निर्धारित करना अनिवार्य हो जाता है।
  3. जबकि अप्रत्यक्ष कर ऐसे कर है जो अधिरोपी प्राधिकरण को सीधे अदा नहीं किए जाते बल्कि किसी अन्य को अदा किए जाते हैं जो कर दाता तथा कर उदग्रहण प्राधिकरण के बीच मध्यवर्ती सम्पर्क के रूप में कर एवं शुल्क उदग्रहण की शक्ति संविधान के प्रावधानों के अनुसार सरकार के तीन अंगों में वितरित है।
  4. जबकि अप्रत्यक्ष कर ऐसे कर है जो अधिरोपी प्राधिकरण को सीधे अदा नहीं किए जाते बल्कि किसी अन्य को अदा किए जाते हैं जो कर दाता तथा कर उदग्रहण प्राधिकरण के बीच मध्यवर्ती सम्पर्क के रूप में कर एवं शुल्क उदग्रहण की शक्ति संविधान के प्रावधानों के अनुसार सरकार के तीन अंगों में वितरित है।
  5. जब सीमा शुल् क का उदग्रहण यथा मूल् य दरों पर किया जाता है अर्थात इसके मूल् य के आधार पर किया जाता है तो निरंकुशता से बचने के लिए तथा विभिन् न सीमा शुल् क संगठनों में समरूप दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मूल् यनिर्धारण हेतु व् यापक दिशानिर्देश निर्धारित करना अनिवार्य हो जाता है।
  6. जबकि अप्रत् यक्ष कर ऐसे कर है जो अधिरोपी प्राधिकरण को सीधे अदा नहीं किए जाते बल्कि किसी अन् य को अदा किए जाते हैं जो कर दाता तथा कर उदग्रहण प्राधिकरण के बीच मध् यवर्ती सम् पर्क के रूप में कर एवं शुल् क उदग्रहण की शक्ति संविधान के प्रावधानों के अनुसार सरकार के तीन अंगों में वितरित है।
  7. जबकि अप्रत् यक्ष कर ऐसे कर है जो अधिरोपी प्राधिकरण को सीधे अदा नहीं किए जाते बल्कि किसी अन् य को अदा किए जाते हैं जो कर दाता तथा कर उदग्रहण प्राधिकरण के बीच मध् यवर्ती सम् पर्क के रूप में कर एवं शुल् क उदग्रहण की शक्ति संविधान के प्रावधानों के अनुसार सरकार के तीन अंगों में वितरित है।
  8. इस प्रयोगशाला ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करने के अपने समर्पित प्रयासों के माध्यम से फसल पौधों की अजैविक प्रतिबलों के प्रति अनुक्रिया के आधार पर जैव-भौतिक , जैव-रासायनिक और कार्यिकीय पहलुओं, पोषक तत्वों के उदग्रहण और उनके उपयोग की दक्षता, संसाधनों के आधार की सुरक्षा एवं प्रबंध के लिए भू-जल का क्षेत्रीय मूल्यांकन, जल उपयोग दक्षता, कटाई उपरांत भंडारण एवं परिरक्षण, अनाजों एवं फलीदार फसलों में कार्बन-नाइट्रोजन संबंधों, तथा फसल गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार के लिए कीट-नाशकजीव संबंधों जैसे पहलुओं पर अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान किए हैं।
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