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इष meaning in Hindi

pronunciation: [ is ]
इष meaning in English

Examples

  1. गौरतलब है कि एश , इश के करीब-करीब यही सारे रूप संस्कृत में भी उपस्थित हैं जैसे एष , एषा , एषणा , इष आदि में कामना , इच्छा , चयन , प्रयास , चाह आदि भाव हैं।
  2. - यह विचार-तत्व ही श्रेष्ठतम इच्छा रूप में ईश्वर ( इष = इच्छा + वर = श्रेष्ठ - > ईश्वर ) का रूप लेती है | प्रत्येक परम-भाव ( अथा परम ताप , परमार्थ ) में परमात्मा का . इसलिए कहा है ...
  3. बर्लिन पर बलिहारी जाऊं , कुछ इसी अंदाज़ में “ इष बिन आइन बर्लिनर ” ( मैं हूं बर्लिन वाला ) , कह कर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने बर्लिन वासियों के लिए समूचे पश्चिम की भावनाओं का इज़हार किया था .
  4. मधु और माधव महीने वसंत ऋतु के , शुक्र और शुचि महीने ग्रीष्म ऋतु के, नभस और नभस्य महीने वर्षा ऋतु के, इष और ऊर्ज महीने शरद ऋतु के, सहस और सहस्य महीने हेमंत ऋतु के तथा तपस और तपस्य महीने शिशिर ऋतु के हैं।
  5. मधु और माधव महीने वसंत ऋतु के , शुक्र और शुचि महीने ग्रीष् म ऋतु के , नभस और नभस् य महीने वर्षा ऋतु के , इष और ऊर्ज महीने शरद ऋतु के , सहस और सहस् य महीने हेमंत ऋतु के तथा तपस और तपस् य महीने शिशिर ऋतु के हैं।
  6. मधु और माधव महीने वसंत ऋतु के , शुक्र और शुचि महीने ग्रीष् म ऋतु के , नभस और नभस् य महीने वर्षा ऋतु के , इष और ऊर्ज महीने शरद ऋतु के , सहस और सहस् य महीने हेमंत ऋतु के तथा तपस और तपस् य महीने शिशिर ऋतु के हैं।
  7. शायरी फोर उम्रदराज ईस ठंड ने तो हमको दौनो तरह से मारा है दिल उदास क्योंकि शरीर हर काम के लिये नकारा है बाकी याद तो आती है बखुब हम ईस सीझन की पर क्या करे अब नजदीक जिंदगी का किनारा है . .! ०६. अब आई फोर ईन्डियन कल्चर भारतीय संस्कृति और उसकी परंपरा शादी के सात वचन इष एकपदी भव ।
  8. ईश्वर का अर्थ इष = इच्छा एवं वर = श्रेष्ठ-हमारी , मानव की श्रेष्ठ्तम इच्छा , कर्म ही ईश्वर हैं- -कहने का अर्थ है मानव स्वयं ही स्रिष्टि का रचयिता है-जैसा विग्यान का कथन है-मानव ही ब्रह्म , ब्रह्मा सब कुछ है-यह कोई धर्म- कथा नहीं है अपितु-यह शुद्ध ग्यान-विग्यान है , विग्यान व्यवहारिक रूप धर्म होता है व वैचारिक रूप दर्शन ....
  9. ( ऋ.स. १ . २ ५ . ८ . ) तैत्तरीय संहिता में ऋतुओं एवं मासों के नाम बताये गये है , जैसे : - बसंत ऋतु के दो मास- मधु माधव , ग्रीष्म ऋतु के शुक्र-शुचि , वर्षा के नभ और नभस्य , शरद के इष ऊर्ज , हेमन्त के सह सहस्य और शिशिर ऋतु के दो माह तपस और तपस्य बताये गये हैं।
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