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इश्क हकीकी meaning in Hindi

pronunciation: [ ishek hekiki ]
इश्क हकीकी meaning in English

Examples

  1. व्यक्तिगत सुख- दुख अथवा लाभ- हानि के स्तर से ऊपर उठते ही वह एक अपूर्व रंग पकड़ लेता है और फिर क्रमशः उस रुप में आ जाता है , जिसको इश्क हकीकी के नाम से जाना जाता है।
  2. बुल्ला गाने लगा -आवो नी सईयों रल देवो नी वधाईमैं वर पाया रांझा माहीबुल्ला ने अलाह को पाने को जो रास्ता अपनाया वो इश्क मिज़ाजी ( इंसान से मोहब्बत) से होते हुए इश्क हकीकी (खुदा से मोहब्बत) को जाता है।
  3. और प्यार की वही कशिश रही कि इश्क मिजाजी की तलाश में उनके कदम इश्क हकीकी की तरफ बढ़ते गए और उनके लेखन में आलेखों में नज्मों में सूफियाना अंदाज़ आता चला गया जो कभी लिखा करती थी दिल्ली की&
  4. और प्यार की वही कशिश रही कि इश्क मिजाजी की तलाश में उनके कदम इश्क हकीकी की तरफ बढ़ते गए और उनके लेखन में आलेखों में नज्मों में सूफियाना अंदाज़ आता चला गया जो कभी लिखा करती थी दिल्ली की गलियाँ , एक लड़की एक जाम .
  5. होती है इश्क मजाजी एक झरोखा होता है जिसमें इश्क हकीकी का ब्रह्मांड देखा जा सकता है , लेकिन अधिकतर लोग उस झरोखे को बंद कर देते हैं और यात्रा वहीँ रुक जाती है ,हमें साहिर का शुक्रगुजार होना चाहिए जो अमृता को राह का इशारा दे गए ...
  6. कभी तो श्रृंगार-रस प्रधान लावनी गायीजाती है , तो कभी वीर-रस प्रधान; कभी राष्ट्र प्रेम से परिपूर्ण लावनी गायी जातीहै, तो कभी दार्शनिक विषय पर, कभी पौराणिक गाथाओं के आधार बनाकर लावनी गायीजाती है, तो कभी राजनीतिक विषयों पर और कभी 'इश्क हकीकी' पर लावनी गायी जाती हैतो कभी 'इश्क मजाजी' पर.
  7. सूफी परंपरा को लेकर जो कुछ मालूम है , वह स्कूली किताबों के पन्नों से ही आया है , और ईश्वर की प्रेमिका-रूप में कल्पना-वन्दना , इश्क हकीकी और इश्क मजाजी , इंसानों की आपसी मोहब्बत पर जोर देना आदि बातें दिमाग में कुछ खाली शब्दों के रूप में ही मौजूद थी।
  8. सूफी परंपरा को लेकर जो कुछ मालूम है , वह स्कूली किताबों के पन्नों से ही आया है , और ईश्वर की प्रेमिका-रूप में कल्पना-वन्दना , इश्क हकीकी और इश्क मजाजी , इंसानों की आपसी मोहब्बत पर जोर देना आदि बातें दिमाग में कुछ खाली शब्दों के रूप में ही मौजूद थी।
  9. 1757 में अपने रांझे संग बुल्ला शाह तो इश्क हकीकी के गीत गाता हुआ , आसमान में तारा बन चमकने को इस धरती को अलविदा कह चला गया, लेकिन आज भी उसी कसूर पाकिस्तान में बाबा बुल्ले शाह की दरगाह पर उसके मुरीद सूफी गीत दिन भर गाते हुए, झूमते नजर आते हैं।
  10. 1757 में अपने रांझे संग बुल्ला शाह तो इश्क हकीकी के गीत गाता हुआ , आसमान में तारा बन चमकने को इस धरती को अलविदा कह चला गया , लेकिन आज भी उसी कसूर पाकिस्तान में बाबा बुल्ले शाह की दरगाह पर उसके मुरीद सूफी गीत दिन भर गाते हुए , झूमते नजर आते हैं।
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