अर्थ-विज्ञान meaning in Hindi
pronunciation: [ areth-vijenyaan ]
Examples
- इनमें विस्तारपूर्वक विभिन्न मुद्दों पर विचार-विनिमय हुआ जैसे-नारी-जाति की प्रगति , सार्वजनिक प्रेस , औषधी एवं शल्यचिकित्सा , संयम , सुधार , अर्थ-विज्ञान , संगीत , रविवासरीय अवकाश-तथा- ‘ चूँकि अलौकिक शक्ति में विश्वा स. ....
- अभी हाल ही में , शाब्दिक अर्थ-विज्ञान स्वतंत्र रूप से वाक्यात्मक, शब्दों के विश्लेषणात्मक और स्वरविज्ञान संबंधी गुण के अध्ययन से आयोजित किया गया था, लेकिन 1990 के दशक में भाषा-विज्ञान सिद्धांत ने शाब्दिक सूचना के इन आयामों को धीरे-धीरे एकीकृत किया गया है।
- इकाई-संबंध मॉडलिंग एक संबंधात्मक स्कीमा डेटाबेस मॉडलिंग विधि है , जिसका प्रयोग सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में किसी सिस्टम, सामान्यतः एक संबंधात्मक डेटाबेस, के एक प्रकार के वैचारिक डेटा मॉडल (या अर्थ-विज्ञान डेटा मॉडल) का निर्माण करने के लिये किया जाता है और इसकी आवश्यकताएं एक टॉप-डाउन रूप में होती हैं.
- फिर भी यदि हम उतनी गहराई तक न जाकर अपने को प्राणि-समाज तक ही नहीं बल्कि उसके एक अंग मानव-समाज तक ही सीमित रखें , तब भी हम देख सकते हैं कि समाज-विज्ञान और अर्थ-विज्ञान की प्रगति ने कैसे सृष्टि में मनुष्य के स्थान को क्रमश : बदल दिया है।
- इकाई-संबंध मॉडलिंग एक संबंधात्मक स्कीमा डेटाबेस मॉडलिंग विधि है , जिसका प्रयोग सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में किसी सिस्टम, सामान्यतः एक संबंधात्मक डेटाबेस , के एक प्रकार के वैचारिक डेटा मॉडल (या अर्थ-विज्ञान डेटा मॉडल ) का निर्माण करने के लिये किया जाता है और इसकी आवश्यकताएं एक टॉप-डाउन रूप में होती हैं.
- इनमें विस्तारपूर्वक विभिन्न मुद्दों पर विचार-विनिमय हुआ जैसे-नारी-जाति की प्रगति , सार्वजनिक प्रेस, औषधी एवं शल्यचिकित्सा, संयम, सुधार, अर्थ-विज्ञान, संगीत, रविवासरीय अवकाश-तथा- ‘चूँकि अलौकिक शक्ति में विश्वास.....सूर्य के सदृश ज्वलन्त हुआ करता है, मनुष्य की बौद्धिक एवं नैतिक उन्नति के पार्श्व में ज्ञान प्रदायिनी शक्ति एवं फलोत्पादन में समर्थ तत्त्व हुआ करता है''-धर्म।
- इनमें विस्तारपूर्वक विभिन्न मुद्दों पर विचार-विनिमय हुआ जैसे-नारी-जाति की प्रगति , सार्वजनिक प्रेस, औषधी एवं शल्यचिकित्सा, संयम, सुधार, अर्थ-विज्ञान, संगीत, रविवासरीय अवकाश-तथा- ‘चूँकि अलौकिक शक्ति में विश्वास.....सूर्य के सदृश ज्वलन्त हुआ करता है, मनुष्य की बौद्धिक एवं नैतिक उन्नति के पार्श्व में ज्ञान प्रदायिनी शक्ति एवं फलोत्पादन में समर्थ तत्त्व हुआ करता है''-धर्म।
- यह किसी बहुत बड़े वैज्ञानिक चमत्कार से कम है क्या ? सरकार के बैंकों में, पोस्ट आफिस में जमा करवाने पर रुपया रो-रो कर कोई आठ साल में दुगुना होता है जब कि राजस्थान में एक 'स्वर्ण-सुख' नामक कंपनी ने एक साल में रुपया पन्द्रह गुना करने का वादा किया तो क्या यह मनमोहन जी के अर्थ-विज्ञान से कम है ?