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अतिबला meaning in Hindi

pronunciation: [ atibelaa ]
अतिबला meaning in English

Examples

  1. महर्षि विश्वामित्र ने अयोध्या से डेढ़ योजन की दूरी पर जाकर सरयू नदी के जल से श्री राम का आचमन कराया और बला तथा अतिबला नाम की दो विद्यायें प्रदान कीं।
  2. महर्षि ने सभी शास्त्रों तथा धनुर्विद्या के आचार्य श्री राम को बला , अतिबला आदि विद्याएँ प्रदान कीं , सभी शास्त्रों का ज्ञान प्रदान किया और भगवान श्रीराम की चिन्मय लीलाओं के वे मूल-प्रेरक रहे तथा लीला-सहचर भी बने।
  3. महर्षि ने सभी शास्त्रों तथा धनुर्विद्या के आचार्य श्री राम को बला , अतिबला आदि विद्याएँ प्रदान कीं , सभी शास्त्रों का ज्ञान प्रदान किया और भगवान श्रीराम की चिन्मय लीलाओं के वे मूल-प्रेरक रहे तथा लीला-सहचर भी बने।
  4. भगवान राम को विश्वामित्र अपने यहाँ रक्षा के बहाने ले गए और वहाँ बला - अतिबला विद्या ( गायत्री और सावित्री ) की शिक्षा देकर उनके द्वारा असुरता का दुर्ग ढहाने तथा रामराज्य , धर्मराज्य की स्थापना का कार्य कराया था।
  5. -गोखरू बीज , तालमखाना बीज , शतावरी , कौंच बीज , नागबला की जड़ , अतिबला की जड़ इन सब को मोटा-मोटा कूटकर कर 2.5 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सुबह शाम लेने से पौरुष शक्ति में बढ़ोत्तरी होती है !
  6. -गोखरू बीज , तालमखाना बीज , शतावरी , कौंच बीज , नागबला की जड़ , अतिबला की जड़ इन सब को मोटा-मोटा कूटकर कर 2.5 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सुबह शाम लेने से पौरुष शक्ति में बढ़ोत्तरी होती है !
  7. विश्वामित्र आये थे उस समय तो नहीं बताया था उन्होंने लेकिन पीछे बताया कि हमने तुम्हें बला विद्या और अतिबला विद्या दोनों को सिखाने के लिये हम लाये हैं गायत्री और सावित्री का रहस्य सिखाने के लिए लाये हैं इससे आपको दोनों फायदे होंगे।
  8. ऋषि विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण दो तपस्वियों ( राजपुत्रों ) को आश्रम में ले जाकर बला व अतिबला सिखायी जो कि कुण्डलिनी साधना का ही दूसरा नाम हैं यम ने नचिकेता को पंचाग्नि विद्या रूपी कुण्डलिनी साधना ही कराई थी जिससे उनको आत्मबोध हो सका।
  9. बला के आयुर्वेदिक यो ग गोक्षुरादि चूर्ण : नागबला, अतिबला, कौंच के शुद्ध (छिलकारहित) बीज, शतावर, तालमखाना और गोखरू, सब द्रव्य बराबर वजन में लेकर कूट-पीस-छानकर महीन चूर्ण करके मिला लें और छन्नी से तीन बार छान लें, ताकि सब द्रव्य अच्छी तरह मिलकर एक जान हो जाएं।
  10. अतिबला , कंघी उत्तर भारत मे हर ऋतु मे मिल जाता है , पत्ते लट्वाकार दन्तुर छोटे व बडे़ हो सकते है , फ़ुल पीले रंग के होते है , बसंत मे फ़ूल आते है , फ़ल कंघी के आकार के गोल गोल होते है , बीज काले या कुछ भुरे रंग के होते हैं ।
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