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१०वाँ meaning in Hindi

pronunciation: [ 10vaan ]
१०वाँ meaning in English

Examples

  1. सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत ( ७५ -८१) “और इनमें (जेहाद से गुरेज़ करने वालों) से अगर कोई मर जाए तो उस पर कभी नमाज़ मत पढ़ें, न उसके कब्र पर कभी खड़े होएँ क्यूं कि उसने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ्र किया और यह हालाते कुफ्र में मरे.
  2. बेशक अल्लाह खूब जानने वाला और रहमत वाला है . ” सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत (२८ मनु महाराज अपनी स्मृति में लिखते हैं कि शूद्रों का साया भी अगर किसी बरहमन पर पड़ जाए तो वह अपित्र हो जाता है और उसको स्नान करना चाहिए, इस क़िस्म की बहुत सी बाते.
  3. ' ' मुनाफ़िक़ लोग इस इस से अंदेशा करते हैं कि मुसलमानों पर कोई ऐसी सूरह या आयत नाजिल हो जाए जो उनको उनके माफ़ी-उज़-ज़मीर पर इत्तला देदे, आप फ़रमा दीजिए अच्छा तुम मज़ाक करते रहो, अल्लाह तअला इस चीज़ को ज़ाहिर करके रहेगा जिसका तुम अंदेशा रखते हो.” सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत (६४)
  4. उसकी मिटटी क्या पिलीद कर पाओगे ? हाँ मुसलमानों को पामाल ज़रूर किए हुए हो. '' वह ऐसा है कि उसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चा दीन देकर भेजा है ताकि इसको तमाम दीनो पर ग़ालिब कर दे, गो कि मुशरिक कितने भी नाखुश हों.” सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत (३३) खुदाए बरतर?
  5. फिर अगर तौबा करलें , नमाज़ पढने लगें और ज़कात देने लगें तो इन का रास्ता छोड़ दो,”' सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत (५) मैं ने क़ब्ले इस्लाम मक्का कें मुख्तलिफ क़बीलों का ज़िक्र इस लिए किया था कि बावजूद इख्तेलाफ ए अकीदे के हज सभी का मुश्तरका मेला था क्यूँकि सब के पूर्वज इस्माईल थे.
  6. “और अल्लाह तअला को सब खबर है तुम्हारे सब कामों का” सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत ( १७) मुसलामानों को डेढ़ हज़ार साल तक अक्ल से पैदल तसव्वुर करने वाले खुद साख्ता रसूल शायद अपनी जगह पर ठीक ही थे कि अल्लाह के कलम में ताजाद पर ताजाद भरते रहे और उनकी उम्मत चूँ तक न करती.
  7. “सो तुम लोग इस ज़मीन पर चार माह तक चल फिर लो और जान लो कि तुम अल्लाह तअला को आजिज़ नहीं कर सकते और यह कि अल्लाह तअला काफिरों को रुसवा करेंगे . ” सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत (२) कहते है क़ुरआन अल्लाह का कलाम है, क्या इस क़िस्म की बातें कोई तख्लीक़ कार-ए-कायनात कर सकता है?
  8. “ऐ ईमान वालो ! अपने बापों को, अपने भाइयों को अपना रफ़ीक़ मत बनाओ अगर वह कुफ़्र को बमुक़बिला ईमान अज़ीज़ रखें और तुम में से जो शख्स इनके साथ रफ़ाक़त रखेगा, सो ऐसे लोग बड़े नाफ़रमान हैं” सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत (२३) खून के रिश्तों में निफ़ाक़ डालने वाला यह मुहम्मद का पैगाम दुन्या का बद तरीन कारे-बद है.
  9. ' ' लोग चाहते हैं कि अल्लाह के नूर को अपने मुंह से फूँक मार के बुझा दें ,हालाँकि अल्लाह तआला बदून इसके अपने नूर को कमाल तक पहुँचा दे , मानेगा नहीं, गो काफ़िर लोग कैसे ही नाखुश हों.” सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत (३२) इस आयत में मुहम्मद ने लाशऊरी तौर पर खुद को अल्लाह तस्लीम कराने की कोशिश की है जो कि उनकी मुहीम की मरकजी नियत थी।
  10. सो दुनयावी ज़िन्दगी का फ़ायदा बहुत क़लील है , अगर तुम न निकले तो वह तुम को बहुत सख्त सज़ा देगा और तुम्हारे बदले दूसरी क़ौम को पैदा कर देगा.और तुम अल्लाह को कुछ ज़रर नहीं पहूंचा सकते और अल्लाह को हर चीज़ पर पूरी पूरी कुदरत है.” सूरात्तुत तौबा ९ - १०वाँ परा आयत (३८-३९) मुहम्मद कुरआनी अल्लाह बन कर अपने पर ईमान लाए मुसलमान बन्दों को पैगामे तशद्दुद दे रहे हैं.
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