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शाण्डिली meaning in Hindi

pronunciation: [ shaanedili ]
शाण्डिली meaning in English

Examples

  1. जिस धरा पर सुलभा , गार्गी, शबरी, शाण्डिली, मुक्ताबाई, जनाबाई जैसी सन्नारियों ने जन्म लिया था, तुम्हारा जन्म भी तो उसी धरा पर हुआ है !
  2. वेदों में वर्णित अन्य प्रसिद्ध स्त्रियों में , जैसे अनुसूया, शाण्डिली, सावित्री, अरुन्धती, आदि को पतिव्रता, निष्ठा आदि जैसे गुणों की वजह से श्रेष्ठ माना जाता है, विदुषी होने के लिए नहीं.
  3. वेदों में वर्णित अन्य प्रसिद्ध स्त्रियों में , जैसे अनुसूया , शाण्डिली , सावित्री , अरुन्धती , आदि को पतिव्रता , निष्ठा आदि जैसे गुणों की वजह से श्रेष्ठ माना जाता है , विदुषी होने के लिए नहीं .
  4. वेदों में वर्णित अन्य प्रसिद्ध स्त्रियों में , जैसे अनुसूया , शाण्डिली , सावित्री , अरुन्धती , आदि को पतिव्रता , निष्ठा आदि जैसे गुणों की वजह से श्रेष्ठ माना जाता है , विदुषी होने के लिए नहीं .
  5. चाहे फिर कबीर जी हों , नानकजी हों , लीलाशाह प्रभुजी हों , राजा परीक्षित हों , संत रविदास हों , एकनाथ जी हों या फिर धन्ना जाट , सदना भक्त , शाण्डिली कन्या हो चाहे अनपढ़ शबरी भीलन हो , जिन्होंने भी प्रीतिपूर्वक भगवान को सुमिरा , भजा उनको बुद्धियोग मिला।
  6. चाहे फिर कबीर जी हों , नानकजी हों , लीलाशाह प्रभुजी हों , राजा परीक्षित हों , संत रविदास हों , एकनाथ जी हों या फिर धन्ना जाट , सदना भक्त , शाण्डिली कन्या हो चाहे अनपढ़ शबरी भीलन हो , जिन्होंने भी प्रीतिपूर्वक भगवान को सुमिरा , भजा उनको बुद्धियोग मिला।
  7. हे भारत की देवियों ! अपने स्वर्णिम अतीत को याद करो | सुलभा, गार्गी, शबरी, शाण्डिली, मुक्ताबाई, जनाबाई जैसी सन्नारियों के दिव्य आदर्शों को अपने जीवन में उतारते हुए जीवन के महान लक्ष्य की ओर अग्रसर हो | तुम भी चाहो तो अनुचित खान-पान, संगदोष आदि से बचकर सद्गुरु के निर्देशानुसार साधना करके जीवन पथ पर आगे बढ़ सकती हो और अपनी सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर सकती हो | - पूज्य बापूजी
  8. हे भारत की देवियों ! अपने स्वर्णिम अतीत को याद करो | सुलभा , गार्गी , शबरी , शाण्डिली , मुक्ताबाई , जनाबाई जैसी सन्नारियों के दिव्य आदर्शों को अपने जीवन में उतारते हुए जीवन के महान लक्ष्य की ओर अग्रसर हो | तुम भी चाहो तो अनुचित खान-पान , संगदोष आदि से बचकर सद्गुरु के निर्देशानुसार साधना करके जीवन पथ पर आगे बढ़ सकती हो और अपनी सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर सकती हो |
  9. हे भारत की देवियों ! अपने स्वर्णिम अतीत को याद करो | सुलभा , गार्गी , शबरी , शाण्डिली , मुक्ताबाई , जनाबाई जैसी सन्नारियों के दिव्य आदर्शों को अपने जीवन में उतारते हुए जीवन के महान लक्ष्य की ओर अग्रसर हो | तुम भी चाहो तो अनुचित खान-पान , संगदोष आदि से बचकर सद्गुरु के निर्देशानुसार साधना करके जीवन पथ पर आगे बढ़ सकती हो और अपनी सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर सकती हो |
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