व्यभिचारी भाव meaning in Hindi
pronunciation: [ veybhichaari bhaav ]
Examples
- संचारी भाव या व्यभिचारी भाव , जो पल-पल पर बदलते हैं , आते-जाते रहते हैं।
- अर्थात विभाव , अनुभाव , व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
- अर्थात विभाव , अनुभाव , व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
- रोमांच आदि इसके अनुभाव हैं इसके व्यभिचारी भाव हैं- निर्वेद , हर्ष, स्मृति, मति, जीव, दया आदि।
- त्रास , मोह , जुगुत्सा , दैन्य , संकट , अपस्मार , चिन्ता , आवेग इत्यादि उसके व्यभिचारी भाव हैं।
- एक अशिक्षित भारतीय युवक का जब पाश्चात्य सभ्यता से आमना-सामना होता है तो हास्य के अनेक विभाव , अनुभाव और व्यभिचारी भाव उभरने लगते है।
- आँखें फाड़ना , टकटकी लगाकर देखना, रोमांच, आँसू, स्वेद, हर्ष, साधुवाद देना, उपहार-दान, हा-हा करना, अंगों का घुमाना, कम्पित होना, गदगद वचन बोलना, उत्कण्ठित होना, इत्यादि इसके अनुभाव हैं, व्यभिचारी भाव
- रस का स्थायी भाव , स्थायी भावो के विभाव,अनुभाव और व्यभिचारी भाव आदि की परिकल्पना भरत ने जिस समय की होगी वह न केवल उस समय मौलिक रही होगी, वरन आज भी उस रसदृष्टि को चुनौती देने वाला विश्वसाहित्य मे कोई नही है।
- ‘अर्थ रस के व्यभिचारी भाव ' में तेतीस के तेतीस व्यभिचारी भावों का उल्लेख लेखक ने बड़े मज़े से किया है और इतने आसान उदाहरण लिये गये हैं कि थोड़ी बहुत हिन्दी का ज्ञान रखने वाला कोई भी व्यक्ति इन्हें समझ सकता है।
- रस का स्थायी भाव , स्थायी भावो के विभाव , अनुभाव और व्यभिचारी भाव आदि की परिकल्पना भरत ने जिस समय की होगी वह न केवल उस समय मौलिक रही होगी , वरन आज भी उस रसदृष्टि को चुनौती देने वाला विश्वसाहित्य मे कोई नही है।