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मकुनी meaning in Hindi

pronunciation: [ mekuni ]
मकुनी meaning in English

Examples

  1. नोयडा के किसी मोड़ पर प्लास्टिक तानकर पेड़ के नीचे किए गए छांव में मकुनी खाते ये लोग , ...
  2. ब्रेड बटर के देखत ही मकुनी अऊर चोखा के याद आवेला , कोल्ड ड्रिंक के केलोरी में छाछ और पन्ना के याद आवेला।
  3. कभी खिचड़ी की फरमाइश कर देते , कभी सत्तू-प्याज की , कभी सिर्फ रोटी-दाल की , कभी मकुनी की और कभी सिर्फ दाल-भात की ही।
  4. के लिए कच्चा सरसों का तेल . ...लो जी तैयार हो गया चोखा ..........ये बाटी चोखा वहां आम तौर पर ठेलों पे खूब बिकता है .........इसके अलावा मकुनी .......आटे में सत्तू की मसालेदार
  5. माँ को बोझ करार दे दिया है . पश्चिम के समाज से कहा जाए कि माँ के हाथ की मकुनी अमृत समान होती है तो वह तर्क के धरातल पर उसे खारिज कर देगा.
  6. दोस्तन के झूठिया देख माई से झूठिया बोलल याद आवेला , प्रदूषण भरल पनिया देख तलवा तलैया के याद आवेला।।गरमी के दिनवा में.......।।ब्रेड बटर के देखत ही मकुनी अऊर चोखा के याद आवेला,कोल्ड ड्रिंक के केलोरी में छाछ और पन्ना के याद आवेला।
  7. रात के ही समय नहीं , सुबह नाश्ते के वक्त भी जब मनोज सूजी के हलुवा के लिए पैर पटकता और मैं अम्मा से चिरौरी करता कि अम्मा, परौठा और भिंडी का भुजिया बना दे ना, मुन्नी बेशर्मी से रात का बचा भात कटोरी में तरकारी से मीस-मीसके ऐसे खाती जैसे भैया कभी मकुनी वाले सतुआ में चावल सान के खाते और आनंद में गोड़ हिलाते रहते.
  8. रात के ही समय नहीं , सुबह नाश्ते के वक्त भी जब मनोज सूजी के हलुवा के लिए पैर पटकता और मैं अम्मा से चिरौरी करता कि अम्मा , परौठा और भिंडी का भुजिया बना दे ना , मुन्नी बेशर्मी से रात का बचा भात कटोरी में तरकारी से मीस-मीसके ऐसे खाती जैसे भैया कभी मकुनी वाले सतुआ में चावल सान के खाते और आनंद में गोड़ हिलाते रहते .
  9. आपन माटी , बोली और समाज के प्रति लगाव ही भोजपुरिया पहिचान के सबसे बड़ा प्रमाण ह | एगो ज़माना रहे जब धोती-कुरता , पगड़ी-लाठी , गमछा में सतुआ औरी जबान पर भोजपुरिया बोली रहे हमनी के भोजपुरिया पहचान | लिट्टी-चोखा , मर्चा-नून-सरसों के साग , मकुनी और फुटेहरी के साथ-साथ ठेकुआ , रबड़ी-बतासा के आपन खाना के मेनू में शामिल करेवाला के भी हम भोजपुरिया मानेनी - भले ही चूल्हा के बदले ओवेन के इस्तेमाल लोग करे |
  10. आपन माटी , बोली और समाज के प्रति लगाव ही भोजपुरिया पहिचान के सबसे बड़ा प्रमाण ह | एगो ज़माना रहे जब धोती-कुरता , पगड़ी-लाठी , गमछा में सतुआ औरी जबान पर भोजपुरिया बोली रहे हमनी के भोजपुरिया पहचान | लिट्टी-चोखा , मर्चा-नून-सरसों के साग , मकुनी और फुटेहरी के साथ-साथ ठेकुआ , रबड़ी-बतासा के आपन खाना के मेनू में शामिल करेवाला के भी हम भोजपुरिया मानेनी - भले ही चूल्हा के बदले ओवेन के इस्तेमाल लोग करे |
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