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बे-औलाद meaning in Hindi

pronunciation: [ baulaad ]
बे-औलाद meaning in English

Examples

  1. मुझे लगा - बे-औलाद देखो अपने अंत समय को किस तरह सुरक्षित रखते हैं ! फिर कहा - ‘ अरे ! भाभी , आप घबराती क्यों हो।
  2. सुमित जी , कवि कह रहा है कि रूह या आत्मा के सुपुत्र दुःख, पीड़ा, अवसाद, शोक ही तो हैं और चूँकि कवि की रूह इनसे खाली है, इसलिए बे-औलाद है।
  3. पड़ोस के बेटे-बेटियों के मोहब् बत संबंधी मामलों का खामियाजा , जब ‘ माता-पिता ' पिटकर करेंगे तब इस सद्गति को देखकर भला कौन बेटे-बेटियों की चाह करेगा , इससे तो बे-औलाद मरना पसंद करेगा।
  4. कारण उसका यह ( अंध ) विश्वास कि उसके जन्म के समय उसकी माता की मृत्यु , फिर पिता , फिर उसके मौसा-मौसी का बे-औलाद रहना और अंश का प्रणय निवेदन के दिन दुर्घटना ग्रस्त होना .
  5. जिसकी वचह यह है कि बनियों ने अपने राक्षसी पाप से सभों की अकल खराब कर दी है जिससे नेकी और बदी को नहीं समझते है और इसी पाप की वजह से ही गरीब-अमीर बे-औलाद रह जाते है।
  6. और उस समय एक माँ शायद यही सोचती होगी मैं बे-औलाद होती तो शायद बढ़िया ही होता कम से कम सुकून तो होता की मैं अकेली हूँ और अकेली ही रहूंगी लेकिन ये अकेलापन और ये तिरस्कार औलाद होने के बाद बर्दाश्त करना मुश्किल होता है …
  7. और जब तक औलाद सलामत है जब तक तुम लोगों का नाम भी अमर है और अमर ही हो , और जोकि औलाद है वोह अमर बीज है और जब तक कि जमीन-आसमान है जब तक तो आदमी बंदा की औलाद अमर है, परन्तु जब से कि काफिर विद्या का जाल चला है जबसे बे-औलाद रह जाते हैं और कच्ची उमर में मर जाते हैं।
  8. और जब तक औलाद सलामत है जब तक तुम लोगों का नाम भी अमर है और अमर ही हो , और जोकि औलाद है वोह अमर बीज है और जब तक कि जमीन-आसमान है जब तक तो आदमी बंदा की औलाद अमर है , परन्तु जब से कि काफिर विद्या का जाल चला है जबसे बे-औलाद रह जाते हैं और कच्ची उमर में मर जाते हैं।
  9. ' होलिका ' हिरनाक्श की बहन थी | उसे वर प्राप्त था कि अग्नि उसे जला नहीं सकेगी | उसको मायावी शक्ति देकर हिरनाक्श ने कहा - ' इस बालक को गोद में लेकर चिता में बैठ जाओ , चिता में आग लगेगी और प्रहलाद जल जाएगा , मगर तुम मायावी शक्ति के कारण नहीं जलोगी | ऐसी औलाद से तो बे-औलाद होना अच्छा है | '
  10. शायद ये दुःख ज्यादा बड़ा होगा कि न होते तो संतोष तो हो जाता लेकिन होने के बाद कोई ये कहे य आपका फ़र्ज़ था अपने किया ही क्या मेरे लिए तब ज्यादा दुःख होता है / इस समय वो बे-औलाद स्त्री यही सोचती है कि मैं ज्यादा खुश हूँ सुखी हूँ उन माताओं से जो बच्चो को जन्म देने के बाद से लेकर उनके व्यस्क होने तक उनकी सारी तकलीफों और जरूरतों का ध्यान रखती है .
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