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फ़त्वा meaning in Hindi

pronunciation: [ fetevaa ]
फ़त्वा meaning in English

Examples

  1. मुझे याद है कि जब एक दिन एक व्यक्ति ये क्रोधित हो कर मुझ से पूछाः कि शैख़े अल अज़हर ने किस प्रकार ये फ़त्वा दे दिया कि शिया दूसरे सम्प्रदायो की तरह एक इस्लामी फ़िरक़ा है ?
  2. जवाब : बयान किये गऐ सवाल में अगर उन्हें दस दिन या उससे ज़्यादा एक जगह रहने का इतमिनान हो तो उन पर पूरी नमाज़ पढ़ना और रोज़ा रखना वाजिब है और यही फ़त्वा इमाम खुमैनी का भी है।
  3. सवाल 645 : उन सिपाहियों के रोज़े और नमाज़ का क्या हुक्म है जो फ़ौज या पासदाराने इन्क़ेलाब में शामिल हैं और जो दस दिन से ज़्यादा सरहदी इलाक़ों में रहते हैं ? बराये महरबानी इमाम ख़ुमैनी का फ़त्वा भी बयान फ़रमायें ?
  4. जब अल्लामी शैख़ मोहम्मद शलतूत , अल अज़हर के धर्म गुरू (शैख़) ने मज़हबे अहले बैत के पालन के जाएज़ होने का फ़त्वा दिया, तो कुछ बंद फ़िक्र और छोटे विचार वालों ने जानकारी न होने के कारण उन के इस फ़त्वे का विरोध किया।
  5. मुजाहिद अपने शागिर्द से कहते थे कि मेरी हर बात और हर फ़त्वा मत लिखा करो सिर्फ़ हदीस रसूल सल्लल लाहो अलेहे वसल्लम को लिखने के कायल रहो शायद कि मैं आज जिन चीज़ो का हुक्म देता हूं कल इससे रुजु कर लूं |
  6. हज़रत जाबिर बिन जैद रज़ि 0 से अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि 0 ने फ़रमाया कि तुम बसरा के फ़कीहो मे से हो इसलिये हमेशा फ़त्वा कुरान व हदीस के मुवाफ़िक ही देना अगर ऐसा न करोगे तो खुद भी हलाक होगे और हलाक करोगे |
  7. ख़ैर मैंने डाक्टर साहिबा की सलाह रद्द कर दी और अपने ज़मीर से फ़त्वा लिया और फिर ‘ अगर अब भी न जागे तो ‘ के लेखक महोदय से भी दीनी हुक्म मालूम किया तो वहां से भी मेरे ज़मीर की ही तस्दीक़ हुई ।
  8. जवाब : अगर वो दस दिन या उससे ज़्यादा एक जगह ठहरने का इरादा रखते हों या वे जानते हों कि दस दिन या उससे ज़्यादा वहां रहना होगा तो वहां पर उनकी नमाज़ पूरी होगी और उन्हें रोज़ा भी रखना होगा और इमाम खुमैनी का फ़त्वा भी यही है।
  9. इमामे खुमैनी की तौज़ीहुल मसाएल के पहले एडीशनों में शुरू में मिलता हैः उसूले दीन पर मुसलमान का अक़ीदा दलील के साथ होना चाहिए और बाद के एडीशनों में मिलता हैः मुसलमान को उसूले दीन पर यकीन होना चाहिए , इस तब्दीली का कारण आपका यही नज़रिया है और हमें यह सच्चाई भी ध्यान में रखनी चाहिए कि आप अपनी इल्मी और एकेडमी नज़रिये के आधार पर फ़िक्ह में फ़त्वा नहीं देते थे।
  10. हाफ़िज़ हमीद ने हकायत की हैं कि कानबी ने ब्यान किया कि मैं इमाम मालिक रह 0 के मर्ज़ मौत मे उनके पास गया और सलाम करके बैठा तो देखा उन को रोते हुए | मैंने कहा आप क्यो रोते हैं | फ़रमाया ऐ कानबी मैं क्यो न रोऊ मुझ से बढ़ कर रोने के काबिल कौन हैं मैंने जिस जिस मसले मे राय से फ़त्वा दिया , मुझे ये अच्छा मालूम होता हैं कि उन मसले के बदले कोड़े से मैं मार खाता , मुझको इसमे गुन्जाईश थी काश मैं राय से फ़त्वा न देता |
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