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पिण्डा meaning in Hindi

pronunciation: [ pinedaa ]
पिण्डा meaning in English

Examples

  1. लोक नृत्य एकल में सागावरकर अक्षय ने अम्बे से गोंदड़ी , गीता बरदेवा ने तेरे हुस्न की चर्चा पिण्डा विच , रेखा सैनी ने चिरमी रा डाला चार , कमलेश कुमार छीपी ने जिस देश में गंगा रहता है की प्रस्तुती दी।
  2. जब कालिया कुम्हार , अपने बत्तीस आँगळवाले चाक के माथे पर , नरम-नरम महीन गारे का पिण्डा रखकर , अपनी फेरणी से चाक को घुमा कर उसे गति देता था , जब उसका चाक , सृष्टि के चक्र की तरह अबाध गति के साथ अनवरत घूमने लगता था।
  3. इसके साथ ख़ास बनता है “ पिण्डा ” - पिण्डा गाये , बैल, बछिया को खिलाने के लिए पके हुवे चावल / भात , झंगोरा / ज्वार और आटे का हाथ से बनाये हुवे बड़े बड़े लड्डू होते हैं | पिण्डे की थाली भी विशेष रूप से सजाई जाती है ..
  4. इसके साथ ख़ास बनता है “ पिण्डा ” - पिण्डा गाये , बैल, बछिया को खिलाने के लिए पके हुवे चावल / भात , झंगोरा / ज्वार और आटे का हाथ से बनाये हुवे बड़े बड़े लड्डू होते हैं | पिण्डे की थाली भी विशेष रूप से सजाई जाती है ..
  5. इसके साथ ख़ास बनता है “ पिण्डा ” - पिण्डा गाये , बैल , बछिया को खिलाने के लिए पके हुवे चावल / भात , झंगोरा / ज्वार और आटे का हाथ से बनाये हुवे बड़े बड़े लड्डू होते हैं | पिण्डे की थाली भी विशेष रूप से सजाई जाती है ..
  6. इसके साथ ख़ास बनता है “ पिण्डा ” - पिण्डा गाये , बैल , बछिया को खिलाने के लिए पके हुवे चावल / भात , झंगोरा / ज्वार और आटे का हाथ से बनाये हुवे बड़े बड़े लड्डू होते हैं | पिण्डे की थाली भी विशेष रूप से सजाई जाती है ..
  7. श्राद्व पक्ष में धार्मिक कार्यक्रम कर रहे लोगों का कहना है कि वह कौओं के लिये भोजन तो रख रहे है , लेकिन काफी इंतजार के बावजूद भाी कौओं के दर्शन नही हो रहे है , श्राद्व के समय पिण्डदान किया जाता है , पिण्डा पाका पूजन कर तर्पण किया जाता है , इसमें एक तर्पण पूर्व दिशा में देवता को , दूसरा उत्तर दिशा में ऋषियों को और तीसरा दक्षिण दिशा में पितरों को किया जाता है जिसमें कौए का बहुत महत्तव है।
  8. श्राद्व पक्ष में धार्मिक कार्यक्रम कर रहे लोगों का कहना है कि वह कौओं के लिये भोजन तो रख रहे है , लेकिन काफी इंतजार के बावजूद भाी कौओं के दर्शन नही हो रहे है , श्राद्व के समय पिण्डदान किया जाता है , पिण्डा पाका पूजन कर तर्पण किया जाता है , इसमें एक तर्पण पूर्व दिशा में देवता को , दूसरा उत्तर दिशा में ऋषियों को और तीसरा दक्षिण दिशा में पितरों को किया जाता है जिसमें कौए का बहुत महत्तव है।
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