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परज meaning in Hindi

pronunciation: [ perj ]
परज meaning in English

Examples

  1. अब मैंने कहा इन कमबख्तों को ये नहीं मालूम कि राग परज में मनमोहन ब्रज के रसिया जो कि भगवान कृश्ण के बारे में है फय्याज खां से ज्यादा खूबसूरत किसी ने नहीं गाया।
  2. नहीँ जानता इस कविता का लेखक कौन है पर ये पंक्ति मेरे को अपने जीवन का सबसे बड़ा सहारा लगती है ( चित्र : डाक्टर परज शुक्ला, मध्य प्रदेश की छत्रियाँ )-रात कोई कुछ कह गया ।
  3. उस समय के तेरे आँसू , सोते हुए लताद्रुमों की छाती पर जम जाते हैं ! ' ‘ परज ' गाती-गाती तो तू बेहोश हो जाती है पर अभागिनी , कभी भैरवराग क् यों नहीं गाती ?
  4. इस थाट के अन्तर्गत आने वाले कुछ प्रमुख राग हैं- ‘ पूरिया ' , ‘ धनाश्री ' , ‘ जैतश्री ' , ‘ परज ' , ‘ श्री ' , ‘ गौरी ' , ‘ वसन्त ' आदि।
  5. जितनी राग रागिनियाँ थीं , ईमन कल्यान, सुध कल्यान झिंझोटी, कन्हाडा, खम्माच, सोहनी, परज, बिहाग, सोरठ, कालंगडा, भैरवी, गीत, ललित भैरी रूप पकडे हुए सचमुच के जैसे गाने वाले होते हैं, उसी रूप में अपने अपने समय पर गाने लगे और गाने लगियाँ।
  6. इसे परज राग से बचाने के लिये आरोह में नि का लंघन करते हैं- सा ग म॑ ध॒ सां या सा ग म॑ ध॒ रें॒ सां विशेष स्वर संगतियाँ - १ ) प म॑ ग, म॑ ऽ ग २) म॑ ध॒ रें सां ३) सा म ऽ म ग, म॑ ध॒ रें॒ सां
  7. जितनी राग रागिनियाँ थीं , ईमन कल्यान , सुध कल्यान , झिंझोटी , कन्हाड़ा , खम्माच , सोहनी , परज , बिहाग , सोरठ , कालंगड़ा , भैरवी , गीत , ललित भैरी रूप पकड़े हुए सचमुच के जैसे गानेवाले होते हैं , उसी रूप में अपने अपने समय पर गाने लगे और गाने लगियाँ।
  8. जितनी राग रागिनियाँ थीं , ईमन कल्यान , सुध कल्यान , झिंझोटी , कन्हाड़ा , खम्माच , सोहनी , परज , बिहाग , सोरठ , कालंगड़ा , भैरवी , गीत , ललित भैरी रूप पकड़े हुए सचमुच के जैसे गानेवाले होते हैं , उसी रूप में अपने अपने समय पर गाने लगे और गाने लगियाँ।
  9. परज में ‘पनियां भरन कैसे जाऊँ घिर आये बदरा , घर मेरा दूर गागर सिर भारी, मैं नाजुक पनिहारी', राग जोगिया में ‘सैंया गए परदेश, कैसे कटे विरह की रतिया….'' के बाद राग भैरवी की ओर गायक बढ़ते हैं और ‘लाल मत डारो गुलाल, ऐसो चटक रंग डारो' और ‘रस के भरे तोरे नैन, साँवरिया तोहे गरवा लगा लूँ' आदि गीतों के इस क्रम में चाँचर ताल की इन होलियों के साथ 16 मात्रा की धमार भी गाई जाती है।
  10. परज में ‘ पनियाँ भरन कैसे जाऊँ घिर आये बदरा , घर मेरा दूर गागर सिर भारी , मैं नाजुक पनिहारी ' , राग जोगिया में ‘ सैंया गये परदेश , कैसे कटे विरह की रतिया …… ' के बाद राग भैरवी की ओर गायक बढ़ते हैं और ‘ लाल मत डारो गुलाल , ऐसो चटक रंग डार ' और ‘ रस के भरे तोरे नैन , साँवरिया तोहे गरवा लगा लूँ ' आदि गीतों के इस क्रम में चाँचर ताल की इन होलियों के साथ 16 मात्रा की धमार भी गायी जाती है।
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