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धर्मध्वजी meaning in Hindi

pronunciation: [ dhermedhevji ]
धर्मध्वजी meaning in English

Examples

  1. तथा कथित भारतीय अंग्रेज़ मैकाले की नीति के धर्मध्वजी बनकर भारत में अंग्रेज़ी और अंग्रेज़ियत को बनाए रखने के लिए जीतोड़ कोशिश करते रहे हैं ताकि वे अपने को देश की जनता से अलग और श्रेष्ठ साबित कर सकें।
  2. साधु-संत और धर्मध्वजी पाखंडप्रेमी उनके खिलाफ अनर्गल प्रचार करने लगते और वे तथ्यों को इस सफाई से तोड़-मरोड़कर पेश करते कि मोदी की जो शक्ति प्रधानमंत्री बनने में लगनी चाहिए , वह इन लोगों को पटाने में बर्बाद हो जाती।
  3. देश में कोई बड़े से बड़ा राजनेता गिरफ्तार हो जाए तो भी किसी को सदमा नहीं पहुंचता लेकिन अगर किसी धर्मध्वजी पर उंगली भी उठती है तो लोग बेचैन हो जाते हैं| कॉंची कामकोटि के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी ऐसा ही सदमा है| गिरफ्तारी और लंबे मुकदमों [ ...]
  4. महाप्रभु जानते थे कि शास्त्रों में आस्था रखनेवाले और शब्द प्रमाण को ही सर्वोच्च माननेवाले पंडितों के इस देश में किसी धर्म की स्थापना तब तक नहीं की जा सकती , जब-तक उस धर्म का विरोध करने वाले व्यक्तियों के धर्मध्वजी नेताओं को शास्त्रार्थ में परास्त न किया जाय।
  5. राष्ट्रीय सहारा , 14 नवम्बर 2004 : देश में कोई बड़े से बड़ा राजनेता गिरफ्तार हो जाए तो भी किसी को सदमा नहीं पहुंचता लेकिन अगर किसी धर्मध्वजी पर उंगली भी उठती है तो लोग बेचैन हो जाते हैं | कॉंची कामकोटि के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी ऐसा ही सदमा है | गिरफ्तारी और लंबे मुकदमों [ ... ]
  6. भावार्थ : - जो श्री रामजी के भक्त कहलाकर लोगों को ठगते हैं , जो धन ( लोभ ) , क्रोध और काम के गुलाम हैं और जो धींगाधींगी करने वाले , धर्मध्वजी ( धर्म की झूठी ध्वजा फहराने वाले दम्भी ) और कपट के धन्धों का बोझ ढोने वाले हैं , संसार के ऐसे लोगों में सबसे पहले मेरी गिनती है॥ 2 ॥
  7. भावार्थ : - जो श्री रामजी के भक्त कहलाकर लोगों को ठगते हैं , जो धन ( लोभ ) , क्रोध और काम के गुलाम हैं और जो धींगाधींगी करने वाले , धर्मध्वजी ( धर्म की झूठी ध्वजा फहराने वाले दम्भी ) और कपट के धन्धों का बोझ ढोने वाले हैं , संसार के ऐसे लोगों में सबसे पहले मेरी गिनती है॥ 2 ॥
  8. अभी तक यहाँ उन स्वार्थी मनुष्य रुपी निशाचरों का प्रवेश नहीं हुआ था जो अपनी वासनाओं की पूर्ति के लिए आवश्यक से चौगुना-पँचगुना पा कर भी झगड़ा करते हैं , परंतु वे पशु यहाँ निवास करते थे जो शांतिपूर्वक समस्त अरण्य को बाँट कर अपना-अपना भाग्य आजमाते हुए न केवल धर्मध्वजी पुरुषों की तरह शिश् नोदर परायण ही थे , प्रत्युत अपने परमात्मा का स्मरण करके अपनी निकृष् ट योनि को उन्नत भी कर रहे थे।
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