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क़िस्तों में meaning in Hindi

pronunciation: [ keiseton men ]
क़िस्तों में meaning in English

Examples

  1. ( पिछली क़िस्तों में बोधिसत्व ने हिन्दी कविता की परंपरा, उसके कुछ जातीय लक्षणों आदि पर विस्तार से बात की।
  2. उन्होंने अपने क्लाइंट यूनीटेक के मुंबई प्रोजेक्ट में लेहमैन ब्रदर्स से तीन क़िस्तों में पैसा निवेश करवाया था .
  3. हम चाहते हैं कि हमें ख़ुशी मिले और बड़ी मिले , अखंड मिले जबकि हमें ख़ुशियां एक मुश्त नहीं मिलतीं , हमें छोटी-छोटी ख़ुशियां मिलती हैं और क़िस्तों में मिलती हैं।
  4. निगम के अधिकारियों का यह भी कहना है कि क़िस्तों में वसूली के लिए क़र्ज़दारों से लगातार संपर्क भी किए जाते हैं , लेकिन फिर भी वे क़र्ज़ नहीं लौटाते .
  5. अगर अब मैं यह कहूं कि जो कुछ गुजरात में यकमुश्त हुआ , उसके बाद लगभग वही सब क़िस्तों में 2002 के बाद से 2008 तक बम धमाकों के रूप में देश व्यापी स्तर पर लगातार होता रहा।
  6. मैं ने रियल स्टेट बैंक से 2 , 51 ,900 ( दो लाख इक्कावन हज़ार नौ सौ ) रियाल उधार लिया जो सालाना क़िस्तों में अदा किया जाना है , क्या मेरे लिए हज्ज करने का हक़ है जबकि बैंक की यह राशि मेरे ऊपर क़र्ज़ है ?
  7. @ प्रिय युवा भाई महेश जी ! इस ‘ ब्लॉगर मीट का स्वरूप ‘ क्या होगा ? इस पर काफ़ी विस्तार से चर्चा पिछली क़िस्तों में हो चुकी है और उनमें से एक का लिंक इस पोस्ट के अंत में ‘ ब्लॉगर मीट का ख़ास मक़सद ‘ वाक्य में भी पैवस्त है।
  8. उन्हें अब ज़ख़्म सीना आ गया हैहमें भी जेहर पीना आ गया हैहक़ीक़त ये है तूफ़ाँ की बदौलतकिनारे पर सफ़ीना आ गया हैमेरी आँखें मुक़द्दस हो गई हैंइन आँखों में मदीना आ गया हैअजी ये ओस की बूंदें नहीं हैंये फूलों को पसीना आ गया हैहमें अब मौत से डर क्या लगेगाहमें क़िस्तों में जीना आ गया हैकिनारे पर वो देखो आस्माँ केउजाला झीना-झीना आ गया है
  9. क्या आपको लगता है कि दुनिया में आज जितनी भी व्यवस्थाएं लागू हैं सब एक ही बार में ‘ परफेक्ट ' बना कर लागू कर दी गयीं थीं !? नास्तिक और धर्म-विमुख इशारों में दो-चार नास्तिकों की बात करके आपने ‘ सिद्ध ' कर दिया कि नास्तिक भी स्त्री का शोषण करते हैं अतः यह ऑप्शन यहीं ख़त्म ! ऐसा ही करतब आपने पिछली क़िस्तों में पश्चिमी पुरुषों को लेकर कर दिखाया है।
  10. हिन्दी कथा-संसार के एक गंभीर नागरिक के ' जनसत्ता' में क्रमशः दो क़िस्तों में प्रकाशित आलेख को आद्योपान्त पढ़ने के पश्चात, यह तथ्य हाथ लगा कि दिन-प्रतिदिन 'हिन्दी के विघटन की बढ़ती दर; और `दुरावस्था' ने उन्हें काफी गहरे तक उद्वेलित कर रखा है- और, इसके परिणामस्वरूप वे अपने गहन चिन्तन मनन के उपरान्त, समस्या समाधान के रूप में अंततः सिर्फ एक ही कारगर युक्ति के पास पहुँचते दिखायी देते हैं कि यदि `दम तोड़ती हिन्दी के प्राण बचाना है तो, उसकी लिपि `देवनागरी' से बदल कर `रोमन' कर दी जाये।
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