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अस्पृष्ट meaning in Hindi

pronunciation: [ asepriset ]
अस्पृष्ट meaning in English

Examples

  1. पतञ्जलि ने ईश्वर का लक्षण बताया है- “क्लेशकर्मविपाकाराशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेषः ईश्वरः” अर्थात् क्लेश , कर्म, विपाक(कर्मफल) और आशय(कर्म-संस्कार) से सर्वथा अस्पृष्ट पुरुष-विशेष ईश्वर है.
  2. पाणिनी ने स्वरों को अस्पृष्ट , य,र,ल,व को ईष स्पृष्ट, श, ष,स, ह को अर्द्धü स्पृष्ट तथा शेष वर्णो को पूर्ण स्पृष्ट माना है।
  3. यहां हर एक जाति की अपनी अलग संस्कृति है , और कई बार आमने सामने मिलने पर भी वे एक-दूसरी से काफी हद तक अस्पृष्ट रह सकी हैं!
  4. पतञ्जलि ने ईश्वर का लक्षण बताया है- “ क्लेशकर्मविपाकाराशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेषः ईश्वरः ” अर्थात् क्लेश , कर्म , विपाक ( कर्मफल ) और आशय ( कर्म-संस्कार ) से सर्वथा अस्पृष्ट पुरुष-विशेष ईश्वर है।
  5. पाणिनी ने स्वरों को अस्पृष्ट , य , र , ल , व को ईष स्पृष्ट , श , ष , स , ह को अर्द्धü स्पृष्ट तथा शेष वर्णो को पूर्ण स्पृष्ट माना है।
  6. कितनी अज़ीब बात है कि जिन स्मृतियों को हम सुरक्षित सहेज कर रखते हैं वह सचमुच याद करने से नहीं लौटतीं , और लौटती भी हैं तो इतनी अस्पृष्ट और धुँधली हो कर, अपरिचित और परायी सी लगती हैं.
  7. मत्र्य जगत् में मानव-अस्तित्व की समस्या , वर्तमान समाज की विरूपता / विद्रूपता व मानवीय सम्बन्धों के बदलते स्वरूप मुझे भी चिन्तित करते हैं , किन्तु मेरी अभिव्यक्ति अन्य कवियों से भिन्न है व किसी विचारधारात्मक प्रभाव से अस्पृष्ट है।
  8. कितनी अज़ीब बात है कि जिन स्मृतियों को हम सुरक्षित सहेज कर रखते हैं वह सचमुच याद करने से नहीं लौटतीं , और लौटती भी हैं तो इतनी अस्पृष्ट और धुँधली हो कर , अपरिचित और परायी सी लगती हैं .
  9. इस लड़की ने अपने धर्म के प्रति अपनी आस्था को जताते हुये यह स्पष्ट किया कि इस धर्म में शरीर की पवित्रता का अति महत्व है , और इसीलिये इसमें शरीर के संबंधित विभिन्न अवयवों को अस्पृष्ट रखने का विधान है।
  10. जो कली खिलेगी जहाँ , खिली , जो फूल जहाँ है , जो भी सुख जिस भी डाली पर हुआ पल्लवित , पुलकित , मैं उसे वहीं पर अक्षत , अनाघ्रात , अस्पृष्ट , अनाविल , हे महाबुद्ध ! अर्पित करती हूँ तुझे।
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