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असूर्यपश्या meaning in Hindi

pronunciation: [ asureypesheyaa ]
असूर्यपश्या meaning in English

Examples

  1. पर्दा और घूंघट प्रथा ही नहीं अपितु अभिजात्य वर्ग में ‘ असूर्यपश्या ' [ जिसको सूरज भी नहीं देख सके ] होना ही उसकी सुरक्षा का आधार माना गया था।
  2. अनेक युवतियां दहेज के दानव की बलि क्यों चढ रही हैं ! आज भी गांव-देहातों में नारी को चारदीवारी के अंदर घूँघट डालकर असूर्यपश्या बनाने की कोशिश क्यों की जाती है !
  3. पुरुषों ने ही अधिकतम ग्रंथों को क्यों लिख डाला ? नारी और शूद्र क्यों वेद पढ़ने सुनने से प्रतिबंधित किये गये ? क्यों नारी को असूर्यपश्या अवगुंठनवती बन कर रहना पड़ा ? ये सारे प्रश्न उत्तर चाहते है ?
  4. हालाँकि इस विधा को आप अधिक पसन्द नहीं करते - ह्यूमर कब हाय हत्या में बदल जाय , पता नहीं : ) - टिकुली , तेल , फुलेल- दूर गाँवों में असूर्यपश्या ग्राहकों तक सामान पहुँचाने की बड़ी प्राचीन परम्परा है यह।
  5. ये दोनों औरतें उसी समाज का हिस्सा हैं जो मर्यादा , नैतिकता और स्त्री की पवित्रता के पक्ष में जमकर ढोल-नगाड़े बजाता है, जो पतिव्रत को स्त्री का धर्म बताता है, जो असूर्यपश्या पत्नी की हिमायत करता है, जो लड़कियों के बदन पर छोटे कपड़े देखकर तुनक उठता है, जो औरत के हंसने-बोलने तक पर पहरे लगाने की फिराक में रहता है।
  6. क्या हमारी बच्चियों को आदमखोरों के हवाले इतनी सुगमता से किया जा सकता है ? अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मुझे बतायें ?एक कविता और कुछ विचारनिर्वस्त्र क्यों हुआ असूर्यपश्या का तन देखो बीच बाजारक्यों दे न सका तन ढंकने को एक टुकडा वस्त्र उसेअबला नारी थी बेचारी दानवों ने कर दिया त्रस्त उसेहिन्दी ब्लोगिंग मे कमेन्ट मे अभद्र होने की परम्परा को निभाया जा रहा हैं ।
  7. ये दोनों औरतें उसी समाज का हिस्सा हैं जो मर्यादा , नैतिकता और स्त्री की पवित्रता के पक्ष में जमकर ढोल-नगाड़े बजाता है , जो पतिव्रत को स्त्री का धर्म बताता है , जो असूर्यपश्या पत्नी की हिमायत करता है , जो लड़कियों के बदन पर छोटे कपड़े देखकर तुनक उठता है , जो औरत के हंसने-बोलने तक पर पहरे लगाने की फिराक में रहता है।
  8. कल्पना कीजिए कि अगर ताजमहल में अस्पताल खुल गया होता तो क्या होता ? जब राष्ट्रपति भवन में नुमाइश लग सकती है, जब राजाओं के पुराने महलों में होटल और सरकारी दफ्तर खुल सकते हैं, जब आज की असूर्यपश्या मुमताज महल जैसी रानियां घर-घर जाकर वोट की भीख मांग सकती हैं तो ताजमहल में अस्पताल क्यों नहीं खुल सकता ? जब मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बन गईं और मस्जिदों को तोड़कर मंदिर बना दिए गए तो आप नहीं चौंके।
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