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शोर करना sentence in Hindi

pronunciation: [ shor karana ]
शोर करना meaning in English

Examples

  1. हर तरफ जय महिला जय महिला..का शोर है.....मेरी महज़ इतनी सी इल्तिजा है कि सिर्फ कविता लिखना या शोर करना हम सबका न हो मक़सद..अपनी कोशिश हो कि सूरत बदलनी चाहिए.बहुत पहले लिखी एक कविता अपने संकलन उर्फ़ इतिहास से आप सभी के लिए...उन अनाम लड़कियों के
  2. आपकी पार्टी की सरकार ने एंडरसन को जाने दिया, उसके द्वारा दिये गये मुआवजे के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अब आप हमारी जेब से भोपाल के पीड़ितों को रिश्वत देना चाहते हैं ताकि वे इस बात का शोर करना बंद कर दे कि जिम्मेदार को सजा दिलाई जाये.
  3. थूकना मना है, फालतू बैठना मना है, फूल तोड़ना मना है, घास पर चलना मना है, धूम्रपान करना मना है, चलती बस से शरीर का कोई अंग बाहर निकालना मना है, गंदगी फैलाना मना है, शोर करना मना है, इस पानी से हाथ धोना मना है.....
  4. हर तरफ जय महिला जय महिला..का शोर है.....मेरी महज़ इतनी सी इल्तिजा है कि सिर्फ कविता लिखना या शोर करना हम सबका न हो मक़सद..अपनी कोशिश हो कि सूरत बदलनी चाहिए.बहुत पहले लिखी एक कविता अपने संकलन उर्फ़ इतिहास से आप सभी के लिए...उन अनाम लड़कियों के नाम जो आज भी ज़िन्दगी के लिए सरगर्दां हैं:
  5. क्या हवाएँ थीं कि उजड़ा प्यार का वह आशियाना, कुछ न आया काम तेरा शोर करना, गुल मचाना, नाश की उन शक्तियों के साथ चलता ज़ोर किसका, किंतु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना, जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से, पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है?
  6. क्या यही कि हम आपके जैसे निकम्मे शासकों को चुनते हैं! आपकी पार्टी की सरकार ने एंडरसन को जाने दिया, उसके द्वारा दिये गये मुआवजे के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अब आप हमारी जेब से भोपाल के पीड़ितों को रिश्वत देना चाहते हैं ताकि वे इस बात का शोर करना बंद कर दे कि जिम्मेदार को सजा दिलाई जाये. उसकी पहचान हो.
  7. आप जैसे लोगो को सिर्फ़ शोर करना आता है दुनिया मे ना तो कोई धर्म है ना कोई जात जो है जो है वो है पैसा और शक्ति, आज कोने “ मायावती ” के साथ दीवाली नही मनाएगा हेर इंसान अपने से जयदा अमीर और शक्तिशाली के साथ संबध रखता है लोग ग़रीब भान और भाई को भूल जाते है और तुम गा रहे हो दूसरी जात की.
  8. क्या हवाएँ थीं कि उजड़ा प्यार का वह आशियाना कुछ न आया काम तेरा शोर करना, गुल मचाना नाश की उन शक्तियों के साथ चलता ज़ोर किसका किंतु ऐ निर्माण के प्रतिनिधि, तुझे होगा बताना जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है यात्रा और यात्री-हरिवंश राय बच्चन साँस चलती है तुझे चलना पड़ेगा ही मुसाफिर!
  9. खैर! चलते-चलते: वफ़ा के नाम पर तुम क्यों संभलकर बैठ गए तुम्हारी बात नहीं, बात है ज़माने की! ज़रुरत मानसिकता बदलने की हर तरफ जय महिला जय महिला..का शोर है.....मेरी महज़ इतनी सी इल्तिजा है कि सिर्फ कविता लिखना या शोर करना हम सबका न हो मक़सद..अपनी कोशिश हो कि सूरत बदलनी चाहिए.बहुत पहले लिखी एक कविता अपने संकलन उर्फ़ इतिहास से आप सभी के लिए...उन अनाम लड़कियों के नाम जो आज भी ज़िन्दगी के लिए सरगर्दां हैं:
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