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चुसनी sentence in Hindi

pronunciation: [ cusani ]
चुसनी meaning in English

Examples

  1. मेरे विचार से चुसनी ठूंस देना भी हिंसा का ही एक रूप है, और छोटे बच्चे को स्वयं को व्यक्त करने के लिये रोने का सहारा न लें तो और करें भी क्या? बच्चे रोकर क्या कहना चाहते हैं, इसको नज़र-अंदाज़ कर देना माता-पिता की लापरवाही है.
  2. भारत का अलीगढ़ हो या महादेश अमेरिका का शिकागो, हम इनसान इस जहर का इस्तेमाल अपने जिगर के टुकड़े पर भी धड़ल्ले से करते आ रहे हैं-चाहे दूध की बोतल का निप्पल हो या चुसनी, या खिलौने-हम उसके मुंह में डाल देते हैं पॉलि विनयाल क्लोराइड, जिसका उसके गुर्दे, जिगर पर सबसे घातक असर पड़ता है।
  3. हां, कुछ दिन पहले अलबत्ता इतना ज़रूर हुआ था (मगर वह मामूली घटना थी, गरमी के दिनों ऐसा आम तौर पर होता है, कम से कम मेरे साथ तो होता ही है) कि मैं उघारे बदन कुर्सी पर बेहाल पसरा हुआ, लाचार पैर बिछौने के मसनद पर गिरे पड़े, और मुंह में संतरे के फ्लेवर वाला सस्ता चुसनी आइसक्रीम.
  4. बंद कमरे में राजनीति के जितने खेल खेले गए होंगे वह तो बाबा या सिब्बल जानते होंगे, मगर बाबा की बातों से स्पष्ट था कि साम दाम दण्ड भेद जैसे सभी हथकण्डे अपनाए गए बाबा को अनशन पर बैठने से लेकिन स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया और बाबा को आश्वासनों और वादों की चुसनी देते रहे.
  5. अब चित्र यह है कि दो बन्दरों (भाजपा और वामपंथी) को एक शातिर बिल्ली बेवकूफ़ बनाकर लगातार सत्ता पर काबिज है, क्योंकि एक कमजोर और मरियल बन्दर (वामपंथ) दूसरे थोड़े मजबूत बन्दर (भाजपा) का साथ नहीं देता, क्योंकि उस मरियल बन्दर के मुँह में बिल्ली ने “ शर्मनिरपेक्षता ” नाम की चुसनी ठूंस रखी है … ।
  6. बंद कमरे में राजनीति के जितने खेल खेले गए होंगे वह तो बाबा या सिब्बल जानते होंगे, मगर बाबा की बातों से स्पष्ट था कि साम दाम दण्ड भेद जैसे सभी हथकण्डे अपनाए गए बाबा को अनशन पर बैठने से लेकिन स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया और बाबा को आश्वासनों और वादों की चुसनी देते रहे.
  7. हर-किसी ऐरे-गैरे … नत्थू-खैरे को सर पे चढाना तो कोई आपसे सीखे … अब इन्हें ही लो … जुम्मा-जुम्मा चार दिन हुए नहीं है पालने में झूला झूलते हुए … मुँह में लगी चुसनी तक तो छोड़ी नहीं गयी अब तक इनसे और मुझे? … अपने वन पीस … सिंगल हैंडिड बाप को आँखें दिखाना शुरू? … भय्यी वाह … बहुत ही बढ़िया ….
  8. जीवन के आस पास घट रही छोटी छोटी बातों का एहसास ही कविता है. बुरका, ट्रेन के हिचकोले और बच्चे की चुसनी तो हर किसी को नजर नहीं आती है, लेकिन हर चीज में छिपी संवेदनशीलता को शब्द देना ही काव्य कला है.मैं शिखाजी को बहुत बधाई देता हूँ, इतनी भावुक सी रचनाओं के लिए और उतने ही सुन्दर नाम वाले ब्लॉग “स्पंदन” के लिए.
  9. अच्छे बिम्ब और बिलकुल नए बिम्ब प्रयोग किये हैं...ज़िंदगी बुर्का ही तो है...अंदर कुछ और बाहर दिखता ही नहीं...ज़िंदगी चुसनी की तरह, बेमतलब की सी ज़िंदगी....और अंतिम तो कमाल ही है...हम केवल इतना ही प्रयास करते हैं जितनी ज़रूरत हो...बहुत सुन्दर भावों में समेट दी है ज़िंदगी...ज़िंदगी गुलाब का पौधा है जिसकी हर शाखा काँटों से भरी हुई है फिर भी एक गुलाब की खुशबू हर टहनी में बसी हुयी है...
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